गाजा, 24 अक्टूबर।
गाजा, जेरूसलम और वेस्ट बैंक में खाद्य संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र के विश्व खाद्य कार्यक्रम ने चेतावनी दी है कि अगर तुरंत मदद नहीं मिली, तो लाखों लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच जाएंगे। खाली बर्तन लिए लोगों की भीड़ इसी हकीकत को बयां करती है कि कैसे एक पूरा क्षेत्र खाने के एक निवाले के लिए संघर्ष कर रहा है। गाजा में हालात सबसे अधिक चिंताजनक हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम के अनुसार, गाजा में सहायता पाने वाले लोगों की संख्या 16 लाख से घटाकर 11 लाख कर दी गई है, जबकि वेस्ट बैंक में यह संख्या चार लाख से घटाकर दो लाख रह गई है। इसका प्रमुख कारण धन की कमी है।
विश्व खाद्य कार्यक्रम के कार्यवाहक प्रमुख कार्ल स्काउ ने बताया कि अगले छह महीनों तक भोजन उपलब्ध कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से 45 करोड़ अमेरिकी डॉलर की मदद मांगी गई है। उनके अनुसार, गाजा की आबादी में अनुमानित 14 लाख लोग गंभीर खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। पिछले तीन वर्षों में वहां खाद्य असुरक्षा दोगुने से भी अधिक हो गई है। अब करीब 10 लाख फिलिस्तीनियों को खाद्य सहायता की जरूरत है। अपने दौरे के दौरान कार्ल स्काउ ने जले हुए जैतून के बागों, शिविरों और गांवों का जायजा लिया। भूख बढ़ने से अस्थिरता का खतरा भी बढ़ रहा है।
कार्ल स्काउ ने चेतावनी दी कि खाद्य संकट का असर केवल लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर भी पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जहां भूख होती है, वहां अस्थिरता पैदा होती है और जहां अस्थिरता होती है, वहां शांति की उम्मीद कम हो जाती है।
वेस्ट बैंक में भी खाद्य संकट तेजी से बढ़ रहा है। विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रमुख के अनुसार, इजराइली बस्तियों के निवासियों की ओर से बढ़ते हमलों ने पहले से मौजूद मानवाधिकार और सुरक्षा संकट को गंभीर खाद्य संकट में बदल दिया है। बस्तियों के विस्तार और फिलिस्तीनियों के इलाकों को अलग करने वाली नीतियों के कारण कई किसान अपने खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। जैतून के बाग, जो उनकी आय का प्रमुख स्रोत थे, अब उजड़ चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों के अनुसार, गाजा में बच्चों का कुपोषण भी गंभीर चिंता का विषय है। यूनिसेफ और विश्व खाद्य कार्यक्रम ने बच्चों के लिए विशेष पोषण कार्यक्रम शुरू किए हैं।
गाजा और वेस्ट बैंक में गंभीर होते खाद्य संकट के बीच विश्व खाद्य कार्यक्रम को वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मांग बढ़ रही है, लेकिन दान घट रहा है। कई बड़े दाता देशों ने अपने बजट में कटौती की है, जिसके कारण राशन में कमी करनी पड़ी है। यह सवाल पूरी दुनिया के सामने है कि 21वीं सदी में भी लाखों लोग भूखे क्यों सो रहे हैं।
गाजा में भुखमरी के पीछे कई कारण हैं। इजराइल और हमास के बीच संघर्ष ने वहां की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। खेत, कारखाने और बाजार तबाह हो चुके हैं। नाकेबंदी और सीमा पर सहायता सामग्री की आवाजाही में बाधाओं के कारण खाद्य पदार्थों की आपूर्ति प्रभावित होती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्राथमिकताओं में बदलाव से भी मानवीय सहायता पर असर पड़ा है। जलवायु परिवर्तन, सूखे और पानी की कमी ने खेती की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के अनुसार, नागरिकों को जानबूझकर भूखा रखना प्रतिबंधित है। संयुक्त राष्ट्र ने कई बार इजराइल से मानवीय सहायता बिना बाधा पहुंचाने की अपील की है, लेकिन जमीनी हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आर्थिक मदद से इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। 45 करोड़ डॉलर की सहायता से छह महीने तक भोजन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है, लेकिन उसके बाद क्या होगा? स्थायी समाधान के लिए युद्ध समाप्त करना और गाजा में शांति बहाल करना जरूरी है, ताकि लोग अपने घर लौट सकें और खेती-बाड़ी फिर शुरू कर सकें। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को नियमित सहायता के लिए स्थायी कोष बनाना चाहिए। स्थानीय लोगों को बीज, खाद और पानी उपलब्ध कराकर फिर से खेती के लिए प्रोत्साहित करना भी जरूरी है।
खाली बर्तन केवल बर्तन नहीं हैं, वे एक पूरी पीढ़ी की पीड़ा का प्रतीक हैं, जो दुनिया से पूछ रही है कि क्या हम इंसान हैं? भूख किसी सीमा को नहीं मानती। इसलिए 45 करोड़ डॉलर की मांग केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि मानवता की परीक्षा है। गाजा और वेस्ट बैंक का खाद्य संकट केवल एक क्षेत्र का संकट नहीं, बल्कि पूरी मानवता का संकट है। यह याद दिलाता है कि शांति के बिना विकास नहीं हो सकता और भोजन के बिना शांति नहीं हो सकती। आज जरूरत केवल आर्थिक सहायता जुटाने की नहीं, बल्कि उस इच्छाशक्ति को जगाने की है, जो युद्ध रोक सके और हर इंसान तक रोटी पहुंचा सके। यही सच्ची मानवता होगी।














