नई दिल्ली, 23 अप्रैल।
उच्चतम न्यायालय ने 2003 में छत्तीसगढ़ के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता राम अवतार जग्गी की हत्या के दोषी और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को दी गई उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी है। यह आदेश जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने अमित जोगी की याचिका पर दिया।
अमित जोगी ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को चुनौती देते हुए उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। सुनवाई के दौरान अमित जोगी के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और मुकुल रोहतगी ने यह आरोप लगाया कि उच्च न्यायालय ने बिना अमित जोगी का पक्ष सुने ही आदेश पारित कर दिया।
यह मामला 4 जून 2003 का है, जब राम अवतार जग्गी की कार में यात्रा करते समय हत्या कर दी गई थी। 2007 में ट्रायल कोर्ट ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, लेकिन अन्य सह-आरोपितों को दोषी ठहराया था। इस फैसले को सीबीआई ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। इसके साथ ही शिकायतकर्ता सतीश जग्गी ने भी अमित जोगी को बरी करने के आदेश को चुनौती दी थी। 2011 में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सीबीआई की याचिका खारिज कर दी थी और यह कहा था कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
हालांकि, उच्चतम न्यायालय ने 2025 में इस फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि सीबीआई की अपील पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए। इसके बाद उच्च न्यायालय ने मामले की पुनः सुनवाई की और ट्रायल कोर्ट के आदेश को निरस्त करते हुए अमित जोगी को मास्टरमाइंड बताते हुए उम्रकैद की सजा का आदेश दिया था।



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