नई दिल्ली, 02 अप्रैल 2026।
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाने की घटना पर उच्चतम न्यायालय ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती का आदेश जारी किया।
सुनवाई के दौरान उच्चतम न्यायालय ने राज्य के एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता से कहा कि पश्चिम बंगाल अत्यधिक ध्रुवीकृत राज्य है और यहां हर किसी की भाषा राजनीतिक रूप से संदर्भित होती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाना न केवल उनके गरिमा के खिलाफ है, बल्कि उच्चतम न्यायालय की प्रतिष्ठा पर भी सवाल उठाता है।
मालदा जिले में स्थित एक ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर के कार्यालय में एक अप्रैल की शाम साढ़े तीन बजे सात न्यायिक अधिकारियों को विशेष गहन पुनरीक्षण के काम के दौरान घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया। इनमें तीन महिला जज भी शामिल थीं। घटना के समय बंधक बनाने वालों के खिलाफ देर शाम तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
उच्चतम न्यायालय ने बताया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के अनुसार, डीएम और एसपी मौके पर उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद उच्च न्यायालय ने राज्य के डीजीपी को फोन कर न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अंततः रात 12 बजे न्यायिक अधिकारियों को मुक्त किया गया।











