काठमांडू, 01 अप्रैल।
चैत्र पूर्णिमा के पावन अवसर पर काठमांडू के बौद्ध क्षेत्रों में तामांग समुदाय ने धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से जुड़ा ‘तेमाल जात्रा’ बड़े श्रद्धा भाव से मनाया। यह जात्रा हर साल चैत्र पूर्णिमा के दिन बौद्ध, स्वयम्भू और नमोबुद्ध क्षेत्रों में आयोजित की जाती है और तामांग समुदाय की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक मानी जाती है।
परंपरा अनुसार इस जात्रा की शुरुआत तेमाल क्षेत्र से मानी जाती है। इस अवसर पर दिवंगत परिजनों की आत्मा की शांति के लिए दीप प्रज्वलित करने और पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु चैत्र पूर्णिमा के दिन बौद्ध में पूजा-अर्चना के बाद बालाजु बाइसधारा में स्नान करते हैं और फिर स्वयम्भू जाकर दीप जलाकर अस्थि विसर्जन करते हैं।
जात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने बौद्ध स्तूप परिसर में ‘छ्योमि’ दीप प्रज्वलित किया और मृतकों के नाम पर ‘ङो’ पूजा संपन्न की। लामा गुरुओं के नेतृत्व में विशेष ‘ङोवा मोन्लम’ पूजा भी आयोजित की गई। मान्यता है कि इस प्रकार की पूजा से मृतक की आत्मा को शांति मिलती है और उसे स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
यह जात्रा चैत्र शुक्ल चतुर्दशी की शाम से प्रारंभ होती है। मकवानपुर, ललितपुर, नुवाकोट, सिन्धुपाल्चोक और काभ्रेपलान्चोक सहित अन्य जिलों से तामांग समुदाय के लोग बड़ी संख्या में इसमें भाग लेते हैं। पूर्णिमा की सुबह बालाजु बाइसधारा में स्नान और स्वयम्भू में पूजा-अर्चना के बाद इस पर्व का समापन होता है।











