भोपाल, 23 अप्रैल।
थानों में थाना प्रभारी के अनुपस्थित रहने और फरियादियों को बार-बार चक्कर लगाने की समस्या को देखते हुए भोपाल पुलिस कमिश्नरेट ने नई पहल शुरू की है। अब एक ही थाने में दो निरीक्षकों की तैनाती की जा रही है, ताकि किसी भी शिकायतकर्ता को बिना सुने लौटना न पड़े। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुलिस कार्यप्रणाली को अधिक तेज, जवाबदेह और प्रभावी बनाना है।
इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया है, जिसे तीन चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा। पहले चरण में जोन-चार के निशातपुरा और जोन-एक के हबीबगंज थाने में इसकी शुरुआत कर दी गई है। निशातपुरा थाने में कार्यवाहक निरीक्षक अनिल यादव को टू आईसी की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि हबीबगंज थाने में कार्यवाहक निरीक्षक नीतू तुलसारिया को यह दायित्व दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत एक निरीक्षक थाना प्रभारी के रूप में कार्य करेगा, जबकि दूसरा निरीक्षक टू आईसी के रूप में उसकी अनुपस्थिति या कानून-व्यवस्था की ड्यूटी के दौरान थाने में मौजूद रहकर शिकायतों की सुनवाई करेगा। इसके अलावा वह माइक्रो बीट व्यवस्था की निगरानी, सीएम हेल्पलाइन के प्रकरणों का निपटारा और रात्रि गश्त पर भी नजर रखेगा।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि बड़े क्षेत्रफल और अधिक अपराध वाले थानों में यह प्रयोग काफी प्रभावी साबित हो सकता है। अतिरिक्त निरीक्षकों की मदद से इस मॉडल को आगे बढ़ाया जाएगा और चारों जोनों के प्रमुख थानों में इसे लागू कर समीक्षा की जाएगी।
इंदौर में यह व्यवस्था पहले से लागू है और वहां इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। यदि भोपाल में भी यह प्रयोग सफल रहता है, तो इसे पूरे पुलिस कमिश्नरेट में विस्तार दिया जाएगा।
भोपाल में लंबे समय से पुलिस बल की कमी एक चुनौती बनी हुई है। ऐसे में दो निरीक्षकों की यह व्यवस्था जहां फरियादियों के लिए राहत लेकर आ सकती है, वहीं कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने में भी सहायक साबित हो सकती है।









