धार्मिक आयोजनों के लिए प्रसिद्ध एक बड़े साहब ने हाल ही में संत समागम के दौरान भंडारे का ऐलान कर दिया। भक्ति तो ठीक थी, लेकिन इस आयोजन ने अधीनस्थों की सांसें…
धार्मिक आयोजनों के लिए प्रसिद्ध एक बड़े साहब ने हाल ही में संत समागम के दौरान भंडारे का ऐलान कर दिया। भक्ति तो ठीक थी, लेकिन इस आयोजन ने अधीनस्थों की सांसें जरूर अटका दीं। राजधानी से करीब 100 किलोमीटर दूर धार्मिक स्थल पर कार्यक्रम था और संदेश साफ—उपस्थिति अनिवार्य। अब विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भक्ति से ज्यादा यात्रा और व्यवस्थाओं में उलझे नजर आए। भंडारा तो भक्तों के लिए था, पर आफत अधीनस्थों पर टूट पड़ी।