भोपाल, 08 अप्रैल 2026।
राजधानी भोपाल में टीईटी अनिवार्यता से जुड़े नए आदेश को लेकर शिक्षकों में आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। बुधवार को बड़ी संख्या में शिक्षक संगठनों ने लोक शिक्षण संचालनालय मुख्यालय का घेराव करते हुए जोरदार प्रदर्शन किया और शासन के खिलाफ नारे लगाए।
यह विरोध केवल भोपाल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी एक साथ आंदोलन देखने को मिला। जिला कलेक्ट्रेट कार्यालयों में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों ने आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की।
दरअसल, हाल ही में जारी आदेश के अनुसार ऐसे शिक्षक जिनकी सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष से अधिक समय शेष है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में परीक्षा पास नहीं करने पर सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई संभव है, जो विरोध का मुख्य कारण बन गया है।
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का हवाला देकर यह निर्णय थोपना अनुचित है, जिससे हजारों पुराने शिक्षकों की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। संयुक्त मोर्चा के सदस्यों के अनुसार विभिन्न जिलों से शिक्षक भोपाल पहुंचे और डीपीआई के बाहर प्रदर्शन में शामिल हुए।
शिक्षक संगठनों ने यह भी कहा कि वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर यह नियम लागू करना न्यायसंगत नहीं है, क्योंकि उस समय टीईटी की अनिवार्यता नहीं थी। उनके अनुसार यह निर्णय पूर्व प्रभाव से लागू किया जा रहा है, जो गलत है।
संगठनों का दावा है कि इस आदेश से करीब डेढ़ लाख शिक्षक प्रभावित होंगे, जिनमें बड़ी संख्या उन शिक्षकों की है जो पहले से सेवा में हैं। इन शिक्षकों का कहना है कि नई शर्त के आधार पर उनकी नौकरी पर संकट खड़ा करना उचित नहीं है।
प्रदर्शन के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने अधिकारियों से चर्चा कर अपनी मांगें रखीं। वहीं, शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन और 18 अप्रैल को प्रदेशव्यापी बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि यह उनके भविष्य और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है, जिस पर वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।













