भोपाल, 18 अप्रैल।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शनिवार को शिक्षकों का बड़ा शक्ति प्रदर्शन होने जा रहा है। ‘अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा’ के आह्वान पर भेल स्थित दशहरा मैदान में प्रदेशभर से शिक्षक ‘मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा’ के तहत एकत्रित हो रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि इस आंदोलन में 50 हजार से अधिक शिक्षकों की भागीदारी संभव है।
मोर्चा के पदाधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) लागू करना अन्यायपूर्ण है। उनका तर्क है कि नियुक्ति के समय सभी योग्यताएं पूरी करने के बाद अब 20–25 वर्षों की सेवा के पश्चात नई शर्तें लागू करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले से प्रदेश के 90 से 95 प्रतिशत शिक्षक प्रभावित हुए हैं, विशेषकर वे जो अध्यापक संवर्ग से शिक्षक संवर्ग में शामिल किए गए हैं और जो पहले से ही वेतनमान, पेंशन, ग्रेच्युटी तथा सेवा अवधि की गणना जैसे मुद्दों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
शिक्षकों का आरोप है कि उनकी सेवा की गणना नियुक्ति तिथि से नहीं की जा रही, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। अब टीईटी की अनिवार्यता ने उनके रोजगार और भविष्य को लेकर असुरक्षा और बढ़ा दी है। उनका कहना है कि यदि सेवा प्रभावित होती है तो पेंशन और ग्रेच्युटी में कमी आने की आशंका भी बनी हुई है।
इससे पहले 8 अप्रैल को जिला स्तर पर और 11 अप्रैल को ब्लॉक स्तर पर आंदोलन किए जा चुके हैं। इसी क्रम में अब राज्य स्तरीय प्रदर्शन भोपाल में आयोजित किया जा रहा है। मोर्चा के पदाधिकारियों ने शिक्षकों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।
वहीं दूसरी ओर, मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दायर कर दी है। ई-फाइलिंग रिकॉर्ड के अनुसार यह याचिका शुक्रवार शाम 4 बजे प्रस्तुत की गई। हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शिक्षक संगठनों के साथ बैठक में सकारात्मक संकेत दिए थे, जिसके बाद रिव्यू पिटीशन दायर होना इस दिशा में सरकार की सक्रियता को दर्शाता है।









