नई दिल्ली, 3 नवंबर।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने दूरसंचार इंटरकनेक्शन नियमों में तीसरा संशोधन जारी कर दिया है। नई व्यवस्था आगामी एक जनवरी 2027 से लागू होगी। इसका उद्देश्य दूरसंचार नेटवर्कों के बीच संपर्क व्यवस्था को आधुनिक बनाना, आईपी आधारित तकनीक को बढ़ावा देना और सेवा प्रदाताओं के बीच यातायात का आदान-प्रदान बेहतर करना है।
ट्राई के अनुसार, इंटरकनेक्शन के जरिए दो या अधिक दूरसंचार नेटवर्क तकनीकी, परिचालन और व्यावसायिक व्यवस्थाओं के माध्यम से जुड़ते हैं। इससे अलग-अलग कंपनियों के उपभोक्ता बिना रुकावट एक-दूसरे से संपर्क कर पाते हैं। ट्राई अधिनियम, 1997 के तहत प्राधिकरण को इंटरकनेक्शन की शर्तें तय करने और तकनीकी अनुकूलता सुनिश्चित करने का अधिकार है।
नियमों की समीक्षा के लिए ट्राई ने 3 अप्रैल 2025 को पूर्व-परामर्श पत्र जारी किया था। इसके बाद 10 नवंबर 2025 को हितधारकों से सुझाव मांगे गए। इस प्रक्रिया में 17 पक्षों ने टिप्पणियां और नौ ने जवाबी सुझाव दिए। 28 जनवरी 2026 को खुली चर्चा भी हुई। प्राप्त प्रतिक्रियाओं के विश्लेषण के बाद संशोधन को अंतिम रूप दिया गया।
नई व्यवस्था में सेवा प्रदाता आपसी सहमति से यातायात के आदान-प्रदान के स्थान तय कर सकेंगे। फिलहाल इंटरकनेक्शन लंबी दूरी और छोटी दूरी के चार्जिंग क्षेत्रों के स्तर पर होता है। इसे धीरे-धीरे लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र के स्तर पर स्थानांतरित किया जाएगा। इससे नेटवर्क मार्ग निर्धारण आसान होगा, विलंबता घटेगी और सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी। पुराने स्तर के इंटरकनेक्शन बिंदुओं को तीन साल में चरणबद्ध रूप से नए स्तर पर लाना होगा।
संशोधन के अनुसार, सभी नए इंटरकनेक्शन आईपी आधारित होंगे। मौजूदा ई1 और टीडीएम तकनीक वाली व्यवस्था को भी तीन साल के भीतर आईपी आधारित प्रणाली में बदला जाएगा। ट्राई का मानना है कि इससे बैंडविड्थ का बेहतर इस्तेमाल होगा और कॉल की गुणवत्ता तथा नेटवर्क प्रदर्शन सुधरेगा।
आईपी आधारित इंटरकनेक्शन के लिए क्षमता तय करने की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई है। इसमें एक साथ संभाली जा सकने वाली कॉल और लिंक की बैंडविड्थ को ध्यान में रखा जाएगा। सेवा प्रदाताओं को गुणवत्ता संबंधी तय मानकों का पालन करना होगा।
नियमों में इंटरकनेक्शन बिंदु वापस करने की प्रक्रिया भी शामिल की गई है। पहले केवल किसी बिंदु को बंद कर यातायात रोकने का प्रावधान था। अब यातायात घटने, किसी क्षेत्र से सेवा हटाने या मार्ग बदलने जैसी परिचालन जरूरतों के आधार पर सेवा प्रदाता इंटरकनेक्शन बिंदु वापस कर सकेंगे।
बैंक गारंटी से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखते हुए पुनर्मूल्यांकन के बाद बैंक गारंटी की वैधता और समीक्षा की अवधि छह महीने से बढ़ाकर 12 महीने कर दी गई है। इंटरकनेक्शन बिंदुओं के लिए बैंक गारंटी की अधिकतम सीमा तय करने की संशोधित प्रक्रिया भी लागू होगी।
इंटरकनेक्शन शुल्क या उसके उपयोग से जुड़े शुल्क के देर से भुगतान पर ब्याज देना होगा। इसकी दर सेवा प्रदाताओं की आपसी सहमति से तय होगी, लेकिन अधिकतम सीमा भारतीय स्टेट बैंक की एक वर्ष की सीमांत लागत आधारित ऋण दर से दो प्रतिशत अधिक होगी।
ट्राई ने नेटवर्क यातायात को पुराने चार्जिंग क्षेत्रों से लाइसेंस प्राप्त सेवा क्षेत्र में स्थानांतरित करने और पुरानी तकनीक से आईपी आधारित व्यवस्था में बदलाव की निगरानी के लिए रिपोर्टिंग के प्रावधान भी किए हैं। नियमों का उल्लंघन होने पर अलग-अलग स्तर के आर्थिक दंड लगाए जा सकेंगे।















