जबलपुर, 19 मई ।
ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मृत्यु से जुड़े मामले में न्यायिक स्तर पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए एक अधिवक्ता ने देश के सर्वोच्च न्यायालय एवं मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजा है।
पत्र में उल्लेख किया गया है कि भोपाल के कटारा हिल्स थाना क्षेत्र में दर्ज मामले में दहेज प्रताड़ना, मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न तथा संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं, जिससे प्रकरण की गंभीरता और बढ़ गई है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि मामले की एक आरोपी पूर्व में जिला एवं सत्र न्यायाधीश रह चुकी हैं और वर्तमान में उपभोक्ता फोरम भोपाल में पदस्थ हैं, जिससे जांच की निष्पक्षता को लेकर पीड़ित परिवार में आशंका उत्पन्न हो रही है तथा उनके पद से हटाने की मांग भी की गई है।
अधिवक्ता ने अपने पत्र में एम्स भोपाल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए बताया कि रिपोर्ट में एंटी-मॉर्टम हैंगिंग, शरीर पर चोटों के निशान और फॉरेंसिक सैंपल सुरक्षित रखने जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जो मामले को और गंभीर बनाती हैं।
इसके साथ ही पत्र में यह भी आशंका जताई गई है कि जमानत मिलने के बाद आरोपियों द्वारा गवाहों को प्रभावित करने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने तथा इलेक्ट्रॉनिक एवं फॉरेंसिक साक्ष्यों को नष्ट करने का प्रयास किया जा सकता है।
मांग की गई है कि मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी या उच्च स्तरीय निगरानी में कराई जाए, सभी महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जाए तथा पीड़ित परिवार और गवाहों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाए।
अधिवक्ता ने कहा कि दहेज मृत्यु जैसे मामले केवल व्यक्तिगत विवाद नहीं होते, बल्कि यह महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास से जुड़े अत्यंत संवेदनशील मुद्दे हैं।






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