नागरिक समस्याएँ
16 May, 2026

24 घंटे में 5 बच्चियां गायब! भोपाल में बढ़ती घटनाओं ने उड़ाए होश

भोपाल में नाबालिग बालिकाओं के लगातार लापता होने के मामलों ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

भोपाल, 16 मई।

राजधानी भोपाल में नाबालिग बच्चियों के लगातार लापता होने की घटनाओं ने गंभीर चिंता का माहौल पैदा कर दिया है। पुलिस रिकॉर्ड और गुमशुदगी रिपोर्टों के अनुसार जिले में प्रतिदिन औसतन तीन से चार नाबालिग बालिकाएं लापता हो रही हैं, जबकि बीते 24 घंटे में ही पांच मासूम बालिकाओं के गायब होने से लोगों में दहशत फैल गई है।

सूत्रों के अनुसार कई मामलों में पुलिस द्वारा बाद में बच्चियों को दस्तयाब कर लिया जाता है, लेकिन इसके बाद उनकी स्थिति और परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि दस्तयाब होने के बाद बच्चियों के साथ क्या हुआ, इसकी विस्तृत और पारदर्शी जांच नहीं हो पाती, जिससे चिंता और बढ़ रही है।

बीते 24 घंटे में अलग-अलग थाना क्षेत्रों से पांच नाबालिग बालिकाओं के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें रालिका विश्वकर्मा, वैष्णवी गौर, चांदनी, आशा कुशवाहा और पलक साहू शामिल हैं। इसके अलावा अन्य मामलों में भी गुमशुदगी की सूचना दर्ज की गई है।

परिजनों का दर्द लगातार सामने आ रहा है। उनका कहना है कि बेटियां घर से सामान्य दिनचर्या के तहत निकली थीं, लेकिन इसके बाद उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया। कई परिजनों ने आरोप लगाया कि शुरुआती समय में पुलिस की सक्रियता अपेक्षाकृत धीमी रहती है, जिससे खोजबीन प्रभावित होती है।

वहीं पुलिस ने विभिन्न मामलों में संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किए हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में आरोप अज्ञात हैं। इस स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है और वे इसे गंभीर सुरक्षा चुनौती मान रहे हैं।

लोगों का आरोप है कि गुमशुदगी के मामलों में ठोस रणनीति का अभाव है, दस्तयाब बच्चियों की काउंसलिंग और जांच पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता तथा मानव तस्करी या अन्य संगठित गिरोहों के एंगल से भी गहन पड़ताल नहीं होती। इसी कारण क्षेत्र में बड़े नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है।

अशोकागार्डन, रातीबर, बैरसिया, ईटखेड़ी सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार ऐसे मामले सामने आने से सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि स्कूल और कॉलेज जाने वाली बच्चियां सबसे अधिक असुरक्षित महसूस कर रही हैं।

इसी बीच प्रशासन से मांग उठ रही है कि नाबालिग गुमशुदगी मामलों के लिए विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाए, मानव तस्करी की गहन जांच हो, दस्तयाब बालिकाओं की चिकित्सीय और मनोवैज्ञानिक जांच अनिवार्य की जाए तथा प्रत्येक थाने में विशेष सुरक्षा सेल सक्रिय किया जाए।

शाहजहांनाबाद पुलिस ने लापता 13 वर्षीय बालक को सुरक्षित दस्तयाब कर परिजनों को सौंप दिया। सीहोर निवासी एक व्यक्ति ने टीबी हॉस्पिटल परिसर ईदगाह हिल्स से बच्चे के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले में गुम इंसान कायम कर बाद में अपहरण का प्रकरण दर्ज किया।

जांच के दौरान पुलिस टीम ने सीसीटीवी फुटेज, मुखबिर तंत्र और तकनीकी सहायता का उपयोग किया। इंस्टाग्राम आईडी से मिले सुराग के आधार पर बालक को नर्मदापुरम से बरामद किया गया और पूछताछ के बाद सुरक्षित परिजनों को सौंप दिया गया।

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