25 अप्रैल।
शहरों में बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए 4 लेन, 6 लेन और कांक्रीट सड़कों का निर्माण तेजी से किया गया है। उद्देश्य था यातायात को सुगम बनाना और जाम की समस्या को कम करना, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट दिखाई देती है। कोलार रोड, मिनाल रोड, जे.के. रोड, त्रिलंगा रोड और मनीषा मार्केट रोड जैसी चौड़ी सड़कों पर भी वाहन रेंगते नजर आते हैं। इसका कारण केवल वाहनों की संख्या नहीं, बल्कि अव्यवस्थित प्रबंधन और जिम्मेदारी की कमी है।
सबसे गंभीर समस्या सड़क किनारे अवैध और अनियंत्रित पार्किंग है। बाजार क्षेत्रों और घनी बस्तियों में वाहन चालक सड़कों को ही पार्किंग के रूप में उपयोग कर रहे हैं। परिणामस्वरूप 6 लेन सड़क व्यवहार में आधी रह जाती है। यह स्थिति न केवल जाम बढ़ाती है, बल्कि आम नागरिक के लिए वाहन चलाना भी चुनौतीपूर्ण बना देती है।
प्रशासनिक जिम्मेदारी का अभाव इस समस्या को और बढ़ाता है। परिवहन विभाग, यातायात पुलिस, नगरीय प्रशासन और जिला प्रशासन के बीच तालमेल की कमी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। सड़क निर्माण के बाद उसके व्यवस्थित उपयोग के लिए न तो स्पष्ट नीति बन पाती है और न ही उसका सख्त क्रियान्वयन हो पाता है। संकेतक, रोड मार्किंग और निगरानी तंत्र भी कई जगहों पर अपर्याप्त हैं।
सार्वजनिक परिवहन की सीमित और अविश्वसनीय व्यवस्था लोगों को निजी वाहन खरीदने के लिए मजबूर करती है। हर नई चौड़ी सड़क और अधिक वाहनों को आकर्षित करती है, जिससे कुछ समय बाद वही सड़क फिर जाम से भर जाती है। पैदल यात्रियों और साइकिल चालकों के लिए भी पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं।
यातायात नियमों का उल्लंघन आम बात बन चुका है। अवैध पार्किंग, अतिक्रमण और गलत दिशा में वाहन चलाने पर कार्रवाई कमजोर रहती है। इससे लोगों में नियमों के प्रति लापरवाही बढ़ती है और अव्यवस्था स्थायी रूप ले लेती है।
समाधान केवल सड़कों के चौड़ीकरण में नहीं, बल्कि उनके प्रभावी प्रबंधन में है। मुख्य मार्गों पर सख्त नो-पार्किंग लागू हो, ऑफ-स्ट्रीट और मल्टीलेवल पार्किंग विकसित की जाए। विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही सार्वजनिक परिवहन को मजबूत कर निजी वाहनों पर निर्भरता कम करनी होगी।
जब तक सड़कें चलने के लिए नहीं, बल्कि खड़ी करने के लिए इस्तेमाल होती रहेंगी, तब तक 6 लेन भी कम पड़ेंगी।










