विजयपुर, 21 अप्रैल।
कर्नाटक के विजयपुर शहर में सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी मल्लिकार्जुन केलगड़े ने 75 वर्ष की आयु में पाली भाषा की परीक्षा में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिससे यह संदेश गया है कि सीखने की कोई सीमा नहीं होती।
पाली भाषा के प्रति अपनी गहरी रुचि के कारण उन्होंने सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित अंतरराष्ट्रीय पाली, संस्कृत एवं तुलनात्मक दर्शन संस्थान में प्रवेश लेकर एक वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम को पूरी निष्ठा और परिश्रम से पूर्ण किया।
इसके बाद उन्होंने परीक्षा में भाग लेते हुए कुल 500 अंकों में से 403 अंक अर्जित कर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसके लिए कर्नाटक संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें प्रमाणपत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।
पाली भाषा को प्राचीन शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त है, जिसे भगवान बुद्ध की शिक्षाओं और त्रिपिटक ग्रंथों को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, ऐसे में इस भाषा में सफलता उनकी मेहनत और समर्पण का परिचायक बनी।
उनकी इस उपलब्धि पर परिवारजनों, मित्रों और शुभचिंतकों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी, वहीं उनकी यह सफलता युवाओं के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।










