नई दिल्ली, 10 अप्रैल 2026।
अल्पसंख्यक भाषाओं के संरक्षण और उनके तकनीकी विकास को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय के कला संकाय में शुक्रवार को पाली भाषा पर केंद्रित भाषिणी संचालन एवं सेवा कार्यशाला आयोजित की गई। यह आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन द्वारा विश्वविद्यालय के बौद्ध अध्ययन उन्नत अध्ययन केंद्र के सहयोग से किया गया।
कार्यशाला में पाली भाषा के संरक्षण और उसके एआई आधारित डिजिटलीकरण पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। पाली, प्राचीन मध्य इंडो-आर्यन भाषा होने के साथ-साथ प्रारंभिक बौद्ध ग्रंथों और त्रिपिटक की प्रमुख भाषा रही है, जो बौद्ध ज्ञान परंपरा और दार्शनिक आधार की धुरी मानी जाती है। इस भाषा का ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत व्यापक है तथा इसे एक शास्त्रीय भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त है।
एआई के क्षेत्र में पाली को कम संसाधन वाली भाषा माना जाता है, जिसके कारण इसके डिजिटलीकरण, डेटा निर्माण और भाषाई सत्यापन के लिए संगठित प्रयासों की आवश्यकता बताई गई। यह पहल अल्पसंख्यक और विरासत भाषाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के व्यापक उद्देश्य से भी जुड़ी हुई है। इस दौरान बौद्ध अध्ययन केंद्र ने एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक सहयोगी के रूप में भाषा की शुद्धता और सांस्कृतिक संदर्भ सुनिश्चित करने में योगदान दिया।
कार्यक्रम के दौरान भाषिणी डिवीजन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ नाग ने भारतीय भाषाओं के माध्यम से डिजिटल सेवाओं और ज्ञान तक समावेशी पहुंच सुनिश्चित करने में एआई की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने उच्च गुणवत्ता वाले डेटा और सशक्त भाषा मॉडल के निर्माण में शैक्षणिक संस्थानों और भाषा समुदायों की भागीदारी को जरूरी बताया। कार्यशाला में पाली भाषा के लिए डेटा संग्रह, सत्यापन प्रणाली और समुदाय आधारित सहयोग के माध्यम से एआई मॉडल विकसित करने पर विस्तृत चर्चा की गई।
इस अवसर पर पाठ संग्रह, ऑडियो रिकॉर्डिंग और पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ, साथ ही भाषादान मंच के जरिए समुदाय आधारित सत्यापन और डेटा योगदान की प्रक्रिया को समझाया गया।
कार्यशाला के अंतर्गत भाषिणी टीम ने अपनी भाषा एआई तकनीकों और विभिन्न अनुप्रयोगों का सजीव प्रदर्शन भी किया। इसमें पाठ, वाणी, दस्तावेज और मल्टीमीडिया क्षेत्रों में बहुभाषी क्षमताओं को दर्शाया गया। कार्यक्रम में अनुवाद, वाणी अनुवाद, दस्तावेज अनुवाद और वीडियो आधारित बहुभाषी रूपांतरण जैसी तकनीकों का प्रदर्शन किया गया।
साथ ही भाषिणी मोबाइल ऐप और अनुवाद प्लगइन के माध्यम से वास्तविक समय में भाषाई समझ और अनुवाद की सुविधाओं को भी प्रस्तुत किया गया। इस दौरान संसदीय और संस्थागत सामग्री के बहुभाषी प्रसंस्करण की क्षमता को भी प्रदर्शित किया गया, जो ज्ञान आधारित क्षेत्रों में इसके उपयोग को रेखांकित करता है।
कार्यक्रम में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, शासन और शिक्षा से जुड़े क्षेत्रों में भाषिणी तकनीक के उपयोग को भी दर्शाया गया। इन प्रदर्शनों ने बहुभाषी पहुंच, डिजिटल समावेशन और तकनीकी सशक्तिकरण को बढ़ावा देने में इस मंच की भूमिका को स्पष्ट किया।








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