अमृतसर, 10 अप्रैल 2026।
खालसा साजना दिवस (वैसाखी) के पावन अवसर पर पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों के दर्शन हेतु पूरे देश से बड़ी संख्या में सिख श्रद्धालु अटारी-वाघा बॉर्डर के रास्ते शुक्रवार सुबह रवाना हुए। इस जत्थे में लगभग 2840 श्रद्धालु शामिल हैं, जो गुरुधामों के दर्शन और धार्मिक आयोजनों में भाग लेंगे।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से इस जत्थे में सबसे बड़ा समूह भेजा गया है, जिसमें लगभग 1763 श्रद्धालु शामिल हैं। इसके अतिरिक्त दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, हरियाणा कमेटी तथा अन्य राज्यों से आए श्रद्धालु भी इस यात्रा का हिस्सा बने हैं, जिससे कुल संख्या 2840 तक पहुंच गई है।
इस धार्मिक यात्रा का नेतृत्व एसजीपीसी सदस्य सुरजीत सिंह तुगलवाल कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सिख श्रद्धालुओं की अपने गुरुधामों के प्रति गहरी आस्था है और यह जत्था पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा ननकाना साहिब, गुरुद्वारा श्री पंजा साहिब (हसन अब्दाल) सहित अन्य ऐतिहासिक गुरुद्वारों में मत्था टेकेगा। यह जत्था मुख्य धार्मिक समागम में शामिल होकर 19 अप्रैल को भारत लौटेगा। श्रद्धालुओं को 10 दिन का वीजा प्रदान किया गया है।

जानकारी के अनुसार इस जत्थे के लिए कुल 1795 पासपोर्ट पाकिस्तान दूतावास को भेजे गए थे, जिनमें से 1763 को स्वीकृति मिली, जबकि 32 श्रद्धालुओं के आवेदन अस्वीकृत कर दिए गए। वीजा न मिलने से कुछ श्रद्धालुओं में निराशा का माहौल देखा गया।
श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर दोनों देशों की सरकारों से अधिक संख्या में वीजा जारी करने की अपील की है, ताकि अधिक से अधिक लोग अपने पवित्र गुरुधामों के दर्शन कर सकें। साथ ही करतारपुर कॉरिडोर को अधिक सुगम बनाने और पाकिस्तान सरकार द्वारा लगाए गए 20 डॉलर शुल्क को समाप्त करने की भी मांग उठाई गई।
एसजीपीसी के सचिव कुलवंत सिंह मन्नन ने बताया कि खालसा साजना दिवस के अवसर पर यह दस दिवसीय धार्मिक यात्रा आयोजित की गई है, जिसमें श्रद्धालु विभिन्न गुरुद्वारों में मत्था टेकेंगे और उत्साहपूर्वक वापसी करेंगे।
जत्थे के प्रमुख सुरजीत सिंह तुगलवाल ने कहा कि गुरु नानक देव जी की पावन भूमि ननकाना साहिब और पंजा साहिब में मत्था टेकना हर सिख के लिए अत्यंत सौभाग्य का विषय है। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी ने मानवता, भाईचारे और एकता का संदेश दिया तथा लंगर परंपरा के माध्यम से समानता का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने अरदास की कि सच्चा वाहेगुरु संपूर्ण मानवता और सिख पंथ को सदैव उन्नति और खुशहाली प्रदान करे।

इस बार जत्थे में लगभग 200 अकेली महिलाओं को भी वीजा दिया गया है, जो बिना किसी पारिवारिक सदस्य के इस यात्रा पर गई हैं। पहले यह निर्णय था कि अकेली महिलाओं को जत्थे में शामिल नहीं किया जाएगा, लेकिन इस बार बड़ी संख्या में उन्हें अनुमति दी गई है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष एक घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई थीं, जिसमें जत्थे के साथ पाकिस्तान गई एक महिला भारत वापस नहीं लौटी थी और बाद में उसके वहीं रुकने तथा विवाह करने की जानकारी सामने आई थी। इस कारण इस वर्ष खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह अलर्ट रखा गया है और यात्रियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
इसी को देखते हुए इस बार अकेली महिला श्रद्धालुओं के लिए बहु-स्तरीय सख्त जांच प्रक्रिया लागू की गई है, जिसमें प्रत्येक महिला को लिखित शपथ-पत्र देना अनिवार्य किया गया है कि वह केवल धार्मिक उद्देश्य से यात्रा कर रही है। इस शपथ-पत्र पर परिवार प्रमुख, संबंधित समिति सदस्य, गांव के सरपंच तथा नंबरदार की पुष्टि आवश्यक रखी गई है।
अधिकारियों के अनुसार इन सख्त प्रावधानों का उद्देश्य यात्रा में पारदर्शिता, जवाबदेही और धार्मिक मर्यादाओं का पालन सुनिश्चित करना है, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की विवादित स्थिति उत्पन्न न हो।





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