बस्तर में नक्सल प्रभाव कम होने के बाद अब सुरक्षा व्यवस्था से विकास की ओर कदम बढ़ाए जा रहे हैं। लंबे समय तक नक्सल मोर्चे पर तैनात अर्धसैनिक बलों के कैंपों को स्थानीय ग्रामीणों की जरूरतों के अनुरूप जन सुविधा केंद्रों में बदलने की प्रक्रिया शुरू हो रही है। इसी दिशा में नेतानार स्थित सीआरपीएफ कैंप को बस्तर का पहला जन सुविधा केंद्र बनाया जा रहा है।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह आगामी 18 मई को दो दिवसीय बस्तर प्रवास के दौरान इस केंद्र का उद्घाटन करेंगे। नक्सल मुक्त बस्तर की घोषणा के बाद सुरक्षा कैंपों को आम लोगों के उपयोग के लिए विकसित करने की बात पहले ही कही जा चुकी थी और अब इसकी शुरुआत जमीन पर दिखाई देने लगी है।
नेतानार क्षेत्र कभी नक्सली गतिविधियों का प्रमुख इलाका माना जाता था। आसपास के क्षेत्रों में कई बड़ी घटनाएं सामने आने के बाद यहां केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का कैंप स्थापित किया गया था। सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बाद धीरे-धीरे नक्सली गतिविधियों में कमी आई और अब यह क्षेत्र पूरी तरह नक्सल मुक्त बताया जा रहा है।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. के अनुसार, 31 मार्च के बाद संभाग के अंदरूनी हिस्सों में नक्सल गतिविधियां पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं। जिन क्षेत्रों में सुरक्षा कारणों से कैंप स्थापित किए गए थे, वहां अब स्थानीय लोगों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में योजना तैयार की गई है।
इन केंद्रों में डिजिटल सेवा केंद्र, कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्र और वन उत्पाद प्रसंस्करण इकाइयों जैसी सुविधाएं विकसित करने की तैयारी है, जिससे ग्रामीणों को रोजगार और जरूरी सेवाएं स्थानीय स्तर पर मिल सकें। नेतानार कैंप इसी योजना के तहत पहला जन सुविधा केंद्र बनने जा रहा है।
अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक बस्तर रेंज के संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्रों में 400 से अधिक सुरक्षा कैंप स्थापित हैं, जहां सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और जिला पुलिस बल के जवान तैनात हैं। अब नक्सल प्रभाव समाप्त होने के बाद इन कैंपों को स्थानीय जरूरतों के अनुरूप जन सुविधा केंद्रों में बदलने की योजना पर काम किया जा रहा है।








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