सरकार व नीतियाँ
13 May, 2026

प्रवासी श्रमिकों के लिए अधिकार आधारित व्यवस्था जरूरी, नियम पालन से आगे बढ़ने का आह्वान

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की बैठक में न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने प्रवासी श्रमिकों के अधिकार आधारित सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और नीति व क्रियान्वयन में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

नई दिल्ली, 13 मई।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने कहा है कि समाज और व्यवस्था को अब केवल नियमों के अनुपालन तक सीमित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर अधिकारों पर आधारित संस्कृति की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

नई दिल्ली स्थित आयोग परिसर में ‘प्रवासी श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा: सरकार और निजी क्षेत्र की साझा जिम्मेदारी’ विषय पर आयोजित कोर ग्रुप बैठक को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नीति निर्माण से अधिक जरूरी उसका प्रभावी क्रियान्वयन और व्यवस्था में संरचनात्मक सुधार है।

उन्होंने कहा कि प्रवासी श्रमिक अन्य श्रमिक वर्गों की तुलना में अधिक संवेदनशील स्थिति में होते हैं, क्योंकि भाषा की बाधा और स्थायी आवास की कमी उन्हें संगठित होने से रोकती है। ऐसे में अब केवल निर्देशों का पालन पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था जरूरी है जहां प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित हो।

उन्होंने 1979 के प्रवासी श्रमिक अधिनियम की सीमाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कई नियोक्ता कानूनी प्रावधानों से बचने के लिए श्रमिकों को निर्धारित पात्रता अवधि पूरी होने से पहले ही अवकाश पर भेज देते हैं।

आयोग सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी ने भी कहा कि यदि श्रमिकों को समय पर वेतन नहीं मिलता तो उनके प्रवास का उद्देश्य ही प्रभावित हो जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि श्रमिकों के साथ उनके परिवारों का भी विस्तृत डेटाबेस तैयार किया जाए ताकि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें।

महासचिव भरत लाल ने प्रवासी श्रमिकों के वैश्विक और राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश की लगभग 28.9 प्रतिशत आबादी प्रवासी श्रमिकों से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि कल्याणकारी उपायों से उत्पादन क्षमता में 1.38 गुना तक सुधार देखा गया है। साथ ही ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड’ जैसी योजनाओं को स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा तक विस्तारित करने की आवश्यकता है।

बैठक में विशेषज्ञों ने कई सुझाव दिए, जिनमें अंतरराज्यीय समन्वय के लिए राष्ट्रीय परिषद का गठन, ई-श्रम पोर्टल को ईपीएफ और ईएसआईसी से जोड़ना, क्यूआर आधारित प्रवासी पहचान प्रणाली लागू करना, कॉरपोरेट रिपोर्टिंग में प्रवासी श्रमिकों का डेटा अनिवार्य करना, शहरी योजनाओं में प्रवासी आवास को मूल घटक बनाना तथा न्यूनतम वेतन के स्थान पर जीवन निर्वाह मजदूरी का मानक अपनाना शामिल है।

यह भी निर्णय लिया गया कि सुरक्षा नियम केवल बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों तक सीमित न रहकर छोटे एवं मध्यम उद्योगों तक भी लागू किए जाएं।

बैठक में सेबी, एमएसएमई मंत्रालय तथा विभिन्न उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

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