नई दिल्ली, 05 मई।
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपने नए सैन्य अभियान ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह पूरी तरह से रक्षात्मक, सीमित और अस्थायी प्रकृति का मिशन है, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर चल रहे वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बयान जारी करते हुए साफ किया कि यह अभियान किसी भी प्रकार की आक्रामक सैन्य कार्रवाई नहीं है, बल्कि निर्दोष वाणिज्यिक जहाजों को ईरान से जुड़े संभावित खतरों से बचाने के लिए शुरू किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ का ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ से कोई संबंध नहीं है और दोनों पूरी तरह स्वतंत्र अभियान हैं।
पेंटागन में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान रक्षा मंत्री ने अमेरिका की मंशा और रणनीति को दोहराते हुए कहा कि इस अभियान का उद्देश्य केवल समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि यह मिशन सीमित दायरे में संचालित किया जा रहा है और इसकी अवधि भी तय है।
हेगसेथ के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग माना जाता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार गुजरता है, जिससे इसकी सुरक्षा वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण हो जाती है।
अमेरिकी रक्षा मंत्री ने आरोप लगाया कि ईरान समुद्री मार्गों में हस्तक्षेप कर रहा है और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य ऐसे खतरों को समाप्त कर अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का पालन सुनिश्चित करना है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी नौसेना के साथ दो वाणिज्यिक जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य से गुजर चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मार्ग को सुरक्षित बनाया जा रहा है।
हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका ने क्षेत्र में मजबूत सुरक्षा घेरा तैयार किया है, जिसमें अमेरिकी युद्धपोतों के साथ सैकड़ों लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और निगरानी विमान शामिल हैं। उन्होंने इसे मानवता की रक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया।
अमेरिका का कहना है कि यह अभियान वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा, समुद्री मार्गों की रक्षा और नाविकों की जान बचाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार बाधित न हो और दुनिया के कमजोर देशों पर इसका नकारात्मक असर न पड़े।








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