भोपाल, 31 मार्च।
नए वित्तीय वर्ष 2026–27 के आगमन के साथ आम जनता की जेब पर कई तरह के असर दिखाई देने लगे हैं। इनमें सबसे अधिक प्रभावित होने वाले हैं वे लोग जो नियमित रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों से गुजरते हैं। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने एक अप्रैल से टोल दरों में लगभग पांच से 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का निर्णय लिया है, जो पूरे देश के हाईवे उपयोगकर्ताओं पर लागू होगा।
मध्य प्रदेश में यह फैसला विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि राज्य का हाईवे नेटवर्क तेजी से विकसित हुआ है। प्रदेश में वर्तमान समय में लगभग 44 नेशनल हाईवे हैं, जिनकी कुल लंबाई 9,000 किलोमीटर से अधिक है। यह नेटवर्क राज्य को देश के प्रमुख औद्योगिक, कृषि और व्यापारिक केंद्रों से जोड़ता है।
इन हाईवे मार्गों पर हर दिन भारी मात्रा में यातायात होता है। ट्रैफिक इंजीनियरिंग के औसत एनुअल एवरेज डेली टेरिफ के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के हाईवे पर रोजाना 20 लाख से 35 लाख वाहन गुजरते हैं। इनमें कार, बस, ट्रक और अन्य व्यावसायिक वाहन शामिल हैं। मालवाहक ट्रकों की हिस्सेदारी कई मार्गों पर 40–50 प्रतिशत तक रहती है, जिससे यह नेटवर्क राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी के समान है।
भारी यातायात का असर टोल कलेक्शन पर भी देखा जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में टोल से होने वाली वार्षिक आय तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2020–21 में यह लगभग ₹2,178 करोड़ थी, जो हाल के वर्षों में बढ़कर लगभग ₹4,188 करोड़ हो गई है। दैनिक आधार पर देखें तो राज्य के नेशनल हाईवे पर ₹10–12 करोड़ प्रतिदिन टोल वसूला जाता है। यह दिखाता है कि हाईवे सिर्फ परिवहन का माध्यम नहीं, बल्कि सरकार के लिए महत्वपूर्ण राजस्व स्रोत भी हैं।
नई टोल दरों के लागू होने के बाद निजी वाहन चालकों से लेकर व्यावसायिक वाहनों तक सभी को अधिक शुल्क देना होगा। औसतन पांच से 10 प्रतिशत वृद्धि का मतलब है कि रोजाना यात्रा करने वालों के खर्च में बढ़ोतरी होगी। इसका सबसे बड़ा असर ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ेगा। ट्रकों और भारी वाहनों के लिए टोल खर्च बढ़ने से माल ढुलाई महंगी होगी, जिसका असर धीरे-धीरे बाजार में वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई देगा। आम उपभोक्ता को अप्रत्यक्ष रूप से महंगाई का सामना करना पड़ सकता है।
फास्टेग उपयोगकर्ताओं के लिए भी यह बदलाव चुनौतीपूर्ण है। सालाना पास की कीमत में लगभग ₹75 की बढ़ोतरी की गई है। इससे नियमित रूप से टोल पार करने वाले वाहन चालकों का खर्च और बढ़ जाएगा। हालांकि, डिजिटल भुगतान के माध्यम से लंबी कतारों से राहत और समय की बचत होती है। सरकार भी कैशलेस भुगतान को बढ़ावा दे रही है, ताकि ट्रैफिक सुचारु बना रहे।
एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, टोल दरों में संशोधन हर साल महंगाई, रखरखाव और निर्माण लागत को ध्यान में रखकर किया जाता है। नेशनल हाईवे के विस्तार, मरम्मत और सुरक्षा सुधार पर लगातार बढ़ते खर्च के कारण यह जरूरी है। मध्य प्रदेश में बन रहे एक्सप्रेसवे और फोरलेन/सिक्सलेन हाईवे इसके प्रमुख उदाहरण हैं। बेहतर सड़कें, तेज कनेक्टिविटी और कम यात्रा समय के लिए सरकार बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है, जिसकी लागत टोल के माध्यम से आंशिक रूप से वसूली जाती है।
विशेष रूप से अधिक ट्रैफिक वाले मार्गों जैसे भोपाल-इंदौर, जबलपुर-नागपुर और ग्वालियर-आगरा पर यह वृद्धि सबसे अधिक महसूस की जाएगी। प्रतिदिन 20–35 लाख वाहनों और ₹10–12 करोड़ दैनिक टोल कलेक्शन को देखते हुए यह साफ है कि यह बढ़ोतरी लाखों लोगों और हजारों व्यवसायों को सीधे प्रभावित करेगी।












