हल्द्वानी , 20 मई ।
नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा सरकार पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज के विकास के प्रति उदासीनता और सुनियोजित उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार योजनाबद्ध तरीके से इन वर्गों के अधिकारों का हनन कर रही है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा से स्वीकृत बजट को जमीनी स्तर पर खर्च करने के बजाय सरकार और अधिकारियों की लापरवाही के कारण बड़ी धनराशि लैप्स हो रही है, जो अत्यंत गंभीर और चिंताजनक स्थिति है।
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार 31 मार्च 2026 को समाज कल्याण विभाग की अनुसूचित जाति उप योजना के लगभग 51 करोड़ रुपये तथा अनुसूचित जनजाति उप योजना के लगभग 3 करोड़ रुपये का बजट लैप्स होना सरकार की नीतिगत विफलता और समाज के प्रति उपेक्षा का स्पष्ट संकेत है।
उन्होंने इसे केवल सामान्य प्रशासनिक त्रुटि नहीं बल्कि योजनाबद्ध ढंग से विकास कार्यों को बाधित करने की स्थिति बताया और कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में अनुसूचित जाति बाहुल्य बस्तियों के लिए लगभग 60 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था, जिसमें से केवल 9 करोड़ रुपये की योजनाएं ही स्वीकृत होकर जिलों तक पहुंच सकीं और उन पर कार्य प्रारंभ हो सका।
शेष 51 करोड़ रुपये की धनराशि समय पर आगे न बढ़ पाने के कारण लैप्स हो गई, जिससे बुनियादी सुविधाओं, अवस्थापना विकास, पेयजल, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी योजनाएं प्रभावित हुईं।
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि जिन योजनाओं का उद्देश्य समाज को मुख्यधारा से जोड़ना है, उनका धन खर्च न होकर वापस चला जाना किसकी जिम्मेदारी है और इसके लिए कौन जवाबदेह है।
उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा से स्वीकृत बजट का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा उपयोग में न आ पाना केवल प्रशासनिक असफलता नहीं बल्कि सरकार की मंशा पर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
उन्होंने कहा कि पूर्व में जब उनकी सरकार थी, तब अनुसूचित जाति एवं जनजाति बस्तियों के विकास के लिए लगभग 100 करोड़ रुपये का बजट सुनिश्चित किया जाता था, जिसे वर्तमान सरकार ने घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया और अब उसका बड़ा हिस्सा भी लैप्स हो गया।
उन्होंने कहा कि यह केवल आंकड़ों का मामला नहीं बल्कि प्रदेश के लाखों परिवारों के अधिकारों और विकास से जुड़ा गंभीर विषय है।
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि लैप्स हुई धनराशि को विशेष स्वीकृति देकर पुनः जारी किया जाए, पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अनुसूचित जाति एवं जनजाति समाज के अधिकारों के साथ ऐसा व्यवहार जारी रहा तो जनांदोलन किया जाएगा, क्योंकि यह केवल वित्तीय लापरवाही नहीं बल्कि सामाजिक न्याय के साथ विश्वासघात है।




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