नई दिल्ली, 16 अप्रैल
पूर्वी जिले की स्पेशल स्टाफ टीम ने ‘ऑपरेशन साइबर हॉक’ के तहत एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी बैंक खातों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर स्थानांतरित करने में सक्रिय था। इस कार्रवाई में बैंक कर्मचारी सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि जांच में विदेशी नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह म्यूल अकाउंट्स का उपयोग कर साइबर ठगी की रकम को विभिन्न खातों में घुमाता था। शुरुआती शिकायत एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज हुई थी, जिसमें बरेली निवासी के खाते से फरवरी माह में दस हजार रुपये की ठगी की गई थी। जांच के दौरान मयूर विहार फेज-एक स्थित बैंक में एक संदिग्ध खाता मिला, जो ‘कंस्ट्रक्शन रॉयल एंटरप्राइज’ के नाम पर शौकिन के नाम से खोला गया था और इसे कई साइबर मामलों से जोड़ा गया। इसके बाद पांडव नगर थाने में मामला दर्ज किया गया।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने सबसे पहले खाता धारक शौकिन को पकड़ा, जिसने पूछताछ में अपने भतीजे शाहरुख उर्फ जोजो की भूमिका का खुलासा किया। इसके बाद शाहरुख को भी गिरफ्तार किया गया। शाहरुख की जानकारी के आधार पर बैंक कर्मचारी की संलिप्तता सामने आई, जिसके बाद सिटी यूनियन बैंक के रिलेशनशिप मैनेजर फ्रांशु कुमार को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि वह आर्थिक लाभ के लिए फर्जी खाते खुलवाने में मदद करता था।
तकनीकी जांच में पुलिस को आरोपियों के मोबाइल से एक टेलीग्राम चैनल का सुराग मिला, जो विदेशी हैंडलर्स से जुड़ा था। ये हैंडलर्स म्यूल अकाउंट्स की जानकारी टेलीग्राम के माध्यम से प्राप्त कर ठगी की रकम को क्रिप्टोकरेंसी में बदल देते थे। मोबाइल की जांच में एक स्क्रीन रिकॉर्डिंग भी मिली, जिसमें एक चीनी मूल के व्यक्ति के साथ वीडियो कॉल पर बातचीत के प्रमाण मिले हैं।
पूछताछ और जांच में यह भी पता चला कि आरोपी एपीके आधारित एसएमएस फॉरवर्डर एप का इस्तेमाल करते थे, जिससे ओटीपी सीधे विदेशी नेटवर्क तक पहुंच जाते थे। इसी के जरिए बैंक खातों पर नियंत्रण कर तुरंत रकम का ट्रांसफर किया जाता था। पूरी कार्यप्रणाली में पहले फर्जी खाते खोले जाते, फिर उनकी जानकारी विदेश भेजी जाती और ठगी की रकम को तेजी से कई खातों में घुमाकर क्रिप्टोकरेंसी में बदल दिया जाता था। पुलिस अब इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के अन्य सदस्यों और मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हुई है।









