हरिद्वार, 09 मई।
दिल्ली–देहरादून एक्सप्रेसवे ने जहां यात्रा को तेज और सुगम बना दिया है, वहीं इसका सीधा असर अब हरिद्वार के पर्यटन और स्थानीय कारोबार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। चारधाम यात्रा के शुरुआती चरण में श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बावजूद धर्मनगरी हरिद्वार इस भीड़ का अपेक्षित लाभ नहीं उठा पा रही है।
होटल, ढाबा, ट्रैवल एजेंसी और छोटे व्यापारियों का कहना है कि अब बड़ी संख्या में यात्री हरिद्वार में ठहरने के बजाय सीधे देहरादून और पहाड़ी क्षेत्रों की ओर बढ़ जा रहे हैं। पहले दिल्ली, नोएडा, हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले यात्री हरिद्वार होकर गुजरते थे और यहां गंगा स्नान, मंदिर दर्शन तथा रात्रि विश्राम करते थे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती थी।
अब दिल्ली से देहरादून की दूरी ढाई से तीन घंटे में तय होने लगी है, जिसके चलते अधिकतर यात्री समय बचाने के लिए एक्सप्रेसवे का उपयोग कर सीधे आगे बढ़ रहे हैं। इसका असर होटल और बाजारों की गतिविधियों पर साफ देखा जा रहा है।
होटल एसोसिएशन के अनुसार इस बार लगभग चालीस प्रतिशत होटल खाली पड़े हैं और चारधाम यात्रा के बावजूद बुकिंग में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कारोबारियों का कहना है कि खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है और हरिद्वार को प्रमुख पड़ाव के रूप में पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा है।
ढाबा संचालकों के अनुसार अब कारोबार केवल सप्ताहांत तक सीमित रह गया है, जबकि बाकी दिनों में ग्राहकों की संख्या काफी कम हो गई है। ट्रैवल कारोबार भी प्रभावित हुआ है और एडवांस बुकिंग में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय तनाव, ईंधन कीमतों को लेकर अनिश्चितता और अन्य आर्थिक कारण भी बताए जा रहे हैं।
व्यापारियों ने सरकार से राहत पैकेज की मांग की है, जिसमें बिजली, पानी और सीवर टैक्स में छूट शामिल है, ताकि यात्रा सीजन में कारोबार को कुछ सहारा मिल सके।
स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि हरिद्वार लंबे समय से चारधाम यात्रा का प्रमुख प्रवेश द्वार रहा है, जहां श्रद्धालु गंगा स्नान और मंदिर दर्शन के बाद यात्रा शुरू करते थे, लेकिन बदलते मार्ग और तेज यातायात सुविधा ने अब पारंपरिक पर्यटन व्यवस्था को गंभीर चुनौती के सामने ला खड़ा किया है।












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