नई दिल्ली, 29 अप्रैल।
दिल्ली सरकार ने खराब मौसम से प्रभावित गेहूं उत्पादक किसानों को राहत देते हुए रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए गेहूं खरीद मानकों में विशेष छूट देने का निर्णय लिया है, जिसके तहत अब चमक खो चुके गेहूं की अधिक मात्रा को भी सरकारी एजेंसियों द्वारा खरीदा जा सकेगा।
सरकारी निर्णय के अनुसार अब 70 प्रतिशत तक लस्टर लॉस वाला गेहूं भी खरीद के योग्य माना जाएगा। साथ ही सिकुड़े और टूटे दानों की स्वीकार्य सीमा को बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे प्रभावित किसानों को राहत मिल सके।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इस वर्ष खराब मौसम के कारण फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ा है, जिससे किसानों को अपनी उपज कम कीमत पर बेचने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता था। इसी स्थिति से बचाव के लिए दिल्ली सरकार ने केंद्र से गुणवत्ता मानकों में ढील देने का अनुरोध किया था, जिसे स्वीकृति मिल गई है और यह प्रावधान दिल्ली के सभी जिलों में लागू रहेगा।
संशोधित व्यवस्था के तहत मौसम से प्रभावित फसल भी अब सरकारी खरीद प्रक्रिया में शामिल हो सकेगी, हालांकि गुणवत्ता नियंत्रण के तहत यह प्रावधान रखा गया है कि टूटे और हल्के टूटे दानों की संयुक्त सीमा छह प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री के अनुसार विशेष छूट के अंतर्गत खरीदे गए गेहूं को सामान्य भंडारण से अलग रखा जाएगा और इसका पूरा रिकॉर्ड पृथक रूप से संधारित किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। ऐसे गेहूं का उपयोग प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा और इसे लंबे समय तक संग्रहित नहीं किया जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस श्रेणी का गेहूं केवल दिल्ली के भीतर ही उपयोग में लाया जाएगा, ताकि स्थानीय खाद्य जरूरतों की पूर्ति हो सके, और यदि भंडारण के दौरान गुणवत्ता में गिरावट आती है तो उसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों को उचित मूल्य दिलाने और आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा इस निर्णय से किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उन्हें मजबूरी में कम दाम पर फसल बेचने की स्थिति नहीं बनेगी। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि खरीद प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से लागू किया जाए।



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