लंदन, 29 अप्रैल
ब्रिटेन में स्थित ईरानी दूतावास द्वारा अपने देश के नागरिकों को लेकर सोशल मीडिया पर जारी किए गए एक संदेश को लेकर गंभीर कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इस संदेश को ब्रिटेन की सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए ईरान के राजदूत सैयद अली मूसावी को विदेश मंत्रालय में तलब किया है। ब्रिटिश पक्ष ने स्पष्ट किया है कि ऐसा बयान पूरी तरह से अस्वीकार्य और उकसाने वाला है।
जानकारी के अनुसार हाल ही में ईरानी दूतावास ने एक संदेश जारी किया था, जिसमें ब्रिटेन में रह रहे ईरानियों से अपने देश के लिए प्राण न्यौछावर करने की बात कही गई थी। इस संदेश के सामने आने के बाद ब्रिटिश मीडिया में भी हलचल मच गई और इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।
ईरानी दूतावास ने इस संदेश को देशभक्ति से जुड़ा हुआ बताया है, वहीं ब्रिटिश सरकार ने इसे गंभीर आपत्ति का विषय मानते हुए खारिज कर दिया है। बताया गया है कि यह संदेश दूतावास के आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर फारसी भाषा में जारी किया गया था, जिसमें प्रवासियों से आत्मोत्सर्ग जैसी भावना व्यक्त करने का आह्वान किया गया था।
ब्रिटेन की आतंकवाद निरोधक इकाई ने भी इस मामले में जांच शुरू कर दी है और उस संदेश की समीक्षा की जा रही है जिसमें कुछ ईरानी नागरिकों से एक विशेष कार्यक्रम से जुड़ने की अपील की गई थी। संदेश में ऐसे शब्दों का उपयोग किया गया था, जिनमें अपने शरीर को देश के लिए समर्पित करने की बात कही गई थी।
कूटनीतिक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच मध्य-पूर्व मामलों के मंत्री ने ईरानी राजदूत को विदेश मंत्रालय में बुलाकर इस पूरे मामले पर सख्त आपत्ति दर्ज कराई। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सोशल मीडिया पर जारी इस प्रकार की टिप्पणियां पूरी तरह अस्वीकार्य हैं और इन्हें तुरंत बंद किया जाना चाहिए, क्योंकि इनसे हिंसा को बढ़ावा देने की आशंका उत्पन्न होती है।
ब्रिटिश सरकार ने दोहराया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। वहीं ईरानी दूतावास ने दावा किया है कि इस प्रकार की अपील किसी भी तरह की हिंसा या शत्रुता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नहीं की गई है।
इसी बीच निर्वासित ईरानी नेतृत्व से जुड़े एक अधिकारी ने इस संदेश को ब्रिटेन की सुरक्षा के लिए खतरा बताया है, जबकि इजराइल ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोपों पर सवाल उठाए हैं।
प्रधानमंत्री स्तर पर भी ईरान की गतिविधियों को लेकर सख्त रुख सामने आया है और संकेत दिए गए हैं कि जल्द ही एक प्रमुख सुरक्षा संगठन को आतंकवादी सूची में शामिल किया जा सकता है। साथ ही यह भी कहा गया है कि इस संगठन से जुड़े कुछ मामलों की जांच सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं।






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