भोपाल, 21 अप्रैल।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकासोन्मुखी दृष्टि और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश का लोक निर्माण विभाग (PWD) अधोसंरचना के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। तकनीक, पारदर्शिता और उच्च गुणवत्ता के संगम से प्रदेश की सड़कों और पुलों का जाल अब अधिक वैज्ञानिक और सुदृढ़ हो गया है। विभाग ने "लोक निर्माण से लोक कल्याण" के संकल्प के साथ विकास कार्यों को सीधे आम जन की आर्थिक उन्नति और सुगमता से जोड़ दिया है।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के अनुसार, मुख्यमंत्री के निर्देश पर प्रदेश के रोड नेटवर्क को व्यवस्थित करने के लिए 'रोड नेटवर्क रैशनलाइजेशन' की प्रक्रिया अपनाई गई है। विभाग ने डिजिटल क्रांति को बढ़ावा देते हुए 'लोक निर्माण सर्वेक्षण मोबाइल एप' के जरिए 71 हजार किमी सड़कों, 3 हजार भवनों और 1400 पुलों का जीआईएस (GIS) आधारित सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। इस डेटा बैंक के माध्यम से अब बुनियादी ढांचों की वास्तविक स्थिति के आधार पर सटीक योजनाएं बनाई जा रही हैं।
प्रदेश में कनेक्टिविटी को नई धार देने के लिए 'समग्र रोड नेटवर्क मास्टर प्लान' तैयार किया गया है। इसके तहत जिला मुख्यालयों को जोड़ने, औद्योगिक क्षेत्रों की सुगमता और शहरों के लिए बाईपास निर्माण पर विशेष जोर है। यात्रा का समय घटाने के उद्देश्य से 6 नए 'ग्रीनफील्ड' मार्गों को चिन्हित किया गया है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु बजट प्रक्रिया को भी जीआईएस आधारित मॉड्यूल से जोड़ दिया गया है, जिससे वित्तीय कार्यों में दोहराव की संभावना समाप्त हो गई है।
नागरिक सुविधाओं के लिए विभाग ने 'लोकपथ 2.0' ऐप लॉन्च किया है, जो एक स्मार्ट ट्रैवल गाइड के रूप में कार्य करता है। इसमें टोल, अस्पताल, पेट्रोल पंप और रूट प्लानर के साथ-साथ सड़क सुरक्षा के लिए 'ब्लैक स्पॉट' चेतावनी की सुविधा भी दी गई है। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सरकार अत्यंत गंभीर है; पिछले 13 महीनों में करीब 875 कार्यों के औचक निरीक्षण के बाद मानकों पर खरे न उतरने वाले 25 ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट किया गया है। साथ ही, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम (PMS 2.0) के जरिए भुगतान प्रक्रिया को भी पूर्णतः डिजिटल बनाया जा रहा है।
पर्यावरण और विकास का संतुलन बिठाते हुए विभाग ने अनोखी पहल की है। सड़क निर्माण के दौरान हुई खुदाई वाले स्थानों को 'लोक कल्याण सरोवर' के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिनकी संख्या 506 तक पहुँच चुकी है। इसके अलावा, फ्लाईओवर पर रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और सड़क किनारे भूजल रिचार्ज जैसी हरित तकनीक अपनाई जा रही है। वर्तमान में प्रदेश में 16,954 किमी सड़क और 531 पुलों का निर्माण प्रगति पर है। एनएचएआई (NHAI) के साथ हुए 1 लाख करोड़ रुपये के ऐतिहासिक समझौते ने मध्य प्रदेश को विकसित राज्य बनाने की दिशा में पंख लगा दिए हैं।










