जबलपुर, 21 अप्रैल
जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मंगलवार को अवमानना से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान भाजपा विधायक एवं खनन कारोबारी संजय पाठक अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। कोर्ट के निर्देश पर उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की गई। मामले की अगली सुनवाई 14 मई 2026 को निर्धारित की गई है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि यह सुओ-मोटो प्रकरण है और इसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। याचिकाकर्ता पक्ष द्वारा विधायक संजय पाठक के हलफनामे को फर्जी बताए जाने पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की। मुख्य न्यायाधीश ने अधिवक्ता से प्रश्न किया कि क्या उन्होंने संबंधित शपथपत्र का अध्ययन किया है, और बिना जांचे ऐसे आरोप लगाने पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि इस प्रकार की दलीलें स्वीकार्य नहीं होंगी।
इस दौरान आशुतोष मनु दीक्षित की ओर से अधिवक्ता देवदत्त कामत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए हस्तक्षेप आवेदन स्वीकार करने की मांग की, लेकिन हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश केवल न्यायालय की सहायता तक सीमित है, हस्तक्षेप का अधिकार प्रदान नहीं करता। इस आधार पर हस्तक्षेप की मांग खारिज कर दी गई।
मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई में अदालत ने पूर्व आदेश के तहत संजय पाठक की व्यक्तिगत उपस्थिति को आवश्यक माना। विधायक की ओर से अगली सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने का अनुरोध किया गया, जिसे न्यायालय ने अस्वीकार कर दिया और उन्हें अगली तारीख पर भी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए।
उल्लेखनीय है कि यह मामला एक खनन प्रकरण की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि संजय पाठक ने संबंधित न्यायाधीश से फोन पर बातचीत कर मामले पर चर्चा करने का प्रयास किया। इसके बाद न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने इस घटना को आदेश पत्र में दर्ज करते हुए स्वयं को मामले से अलग कर लिया था और प्रकरण को मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया था।










