भोपाल, 15 अप्रैल।
मध्य प्रदेश में ई-उपार्जन पोर्टल की ‘सैटेलाइट सत्यापन’ प्रक्रिया में गंभीर तकनीकी खामियों को लेकर हजारों किसानों के संकट में फंसने का मामला सामने आया है। इस मुद्दे को उठाते हुए एक वरिष्ठ विपक्षी नेता ने सरकार पर तीखा प्रहार किया है, और कहा है कि इन त्रुटियों के कारण बड़ी संख्या में किसान आर्थिक तंगी की स्थिति में पहुंच गए हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया कि यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि किसानों के हित में बनाई गई नीतियों की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है। साथ ही उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि कई जिलों से चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। विशेष रूप से एक जिले का उदाहरण देते हुए बताया गया कि हजारों किसानों का सैटेलाइट सर्वे फेल दिखाया गया है, जबकि वास्तव में उन्होंने गेहूं, चना और मसूर की फसल बोई थी। गलत एंट्री के कारण ये किसान खरीदी प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं।
आरोप है कि स्लॉट बुकिंग के समय किसानों को ‘सैटेलाइट द्वारा असत्यापित’ का संदेश दिखाकर उनकी फसल बिक्री पर रोक लगाई जा रही है, जिससे छोटे और सीमांत किसान सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कई परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ने के साथ विवाह संबंधी खर्च, बच्चों की फीस और कर्ज चुकाने में भी भारी दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे में तकनीकी खामियों का बोझ किसानों पर डालना अन्यायपूर्ण बताया गया है।
सरकार की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि क्या यही कृषि कल्याण की वास्तविकता है, जहां खरीदी में देरी के बाद अब तकनीकी बाधाओं के कारण किसानों को अपनी उपज बेचने से रोका जा रहा है। आरोप है कि डिजिटल प्रणाली के नाम पर किसानों को परेशान किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले में त्वरित समाधान की मांग करते हुए पांच प्रमुख सुझाव भी दिए गए हैं, जिनमें प्रभावित किसानों का तत्काल मैन्युअल सत्यापन कर खरीदी में शामिल करना, सैटेलाइट सर्वे त्रुटियों की उच्चस्तरीय जांच, रद्द पंजीयन या स्लॉट वाले किसानों को पुनः अवसर, खरीदी प्रक्रिया को सरल बनाना और आर्थिक क्षति का मुआवजा शामिल है।
इसके साथ चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो किसानों के हित में व्यापक आंदोलन किया जाएगा।










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