उज्जैन, 22 अप्रैल
सिंहस्थ-2028 के भव्य आयोजन की तैयारियों को लेकर उज्जैन में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाणा की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई। इस बैठक में सिंहस्थ से जुड़ी पुलिस व्यवस्था, सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, तकनीकी नवाचार, और प्रशिक्षण रणनीतियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि सिंहस्थ-2028 केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है, जिसे सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित किया जाएगा।
बैठक में “पुलिस ड्यूटी पोर्टल” का शुभारंभ भी किया गया, जिसे पूरी तरह से eHRMS प्रणाली से एकीकृत किया गया है। यह पोर्टल पुलिस कर्मियों की ऑनलाइन पंजीकरण, प्रशिक्षण, डेटा प्रबंधन और ड्यूटी आवंटन को अधिक पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनाता है।
इसके बाद “सिंहस्थ साइबर सुरक्षा योजना” का विस्तृत प्रस्तुतीकरण हुआ, जिसमें डिजिटल सुरक्षा, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग, फेक न्यूज नियंत्रण और श्रद्धालुओं के डिजिटल डेटा की सुरक्षा पर जोर दिया गया। इस योजना के अंतर्गत रियल टाइम साइबर इंटेलिजेंस सिस्टम को मजबूत किया जाएगा।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राकेश गुप्ता ने सिंहस्थ-2028 से जुड़ी संभावित चुनौतियों पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें भीड़ प्रबंधन, यातायात दबाव, वीआईपी मूवमेंट और आपातकालीन परिस्थितियों के प्रबंधन पर चर्चा की गई।
सिंहस्थ-2028 हेतु 21 दिवसीय प्रशिक्षण मॉड्यूल का शुभारंभ किया गया, जिसमें भीड़ नियंत्रण, आपदा प्रबंधन, वीआईपी सुरक्षा, ट्रैफिक प्रबंधन और प्राथमिक चिकित्सा जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं।
पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने बताया कि इस आयोजन में लगभग 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना है, और इसे सुरक्षित और सुव्यवस्थित ढंग से प्रबंधित करने के लिए बहु-स्तरीय सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन योजना बनाई गई है।








.jpg)


