इंदौर, 22 अप्रैल
इंदौर में लोक निर्माण विभाग के तीन अधिकारियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ने की कार्रवाई से हड़कंप मच गया। लोकायुक्त पुलिस की टीम ने मंगलवार को सुनियोजित तरीके से कार्रवाई करते हुए कार्यपालन यंत्री, अनुविभागीय अधिकारी और उपयंत्री को ट्रैप कर गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई में विभाग के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सामने आए हैं।
लोकायुक्त टीम ने कार्यपालन यंत्री जयदेव गौतम को उनके शासकीय निवास से 1.50 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा। वहीं अनुविभागीय अधिकारी टीके जैन को कार्यालय परिसर के पोर्च के नीचे से एक लाख रुपये की राशि लेते समय रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। तीसरे आरोपी उपयंत्री अंशु दुबे ने भी एक लाख रुपये की मांग की थी, लेकिन उस समय पूरी राशि उपलब्ध नहीं होने के कारण उसने रकम नहीं ली। कुल मिलाकर 2.50 लाख रुपये की रिश्वत राशि जब्त की गई है।
मामले में धार जिले के सागोर अचाना रोड निवासी राजपाल सिंह पंवार, जो एक शासकीय ठेकेदार और पटेल श्री इंटरप्राइजेस के संचालक हैं, ने शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी फर्म ने वर्ष 2023 में मैथवाड़ा-फोरलेन पहुंच मार्ग निर्माण का कार्य लगभग 4.73 करोड़ रुपये में लिया था। कार्य पूर्ण होने के बाद 4.51 करोड़ रुपये का अंतिम बिल भुगतान के लिए प्रस्तुत किया गया था।
आवेदक के अनुसार अंतिम भुगतान के बदले अधिकारियों द्वारा कुल 3.50 लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। इसमें कार्यपालन यंत्री द्वारा 1.50 लाख, अनुविभागीय अधिकारी द्वारा एक लाख और उपयंत्री द्वारा एक लाख रुपये की मांग की गई थी। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर ट्रैप दल का गठन किया गया और पूरे मामले की योजना तैयार की गई।
पूर्व निर्धारित रणनीति के तहत लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई को अंजाम दिया। जयदेव गौतम को उनके निवास पर रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया, जबकि टीके जैन को कार्यालय परिसर में एक लाख रुपये लेते समय गिरफ्तार किया गया। अंशु दुबे द्वारा भी रिश्वत की मांग की पुष्टि होने पर उसके विरुद्ध भी साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।
लोकायुक्त के कार्यवाहक निरीक्षक ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 तथा भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। मामले में आगे की जांच और कार्रवाई जारी है।
इस पूरी कार्रवाई में निरीक्षक सहित अन्य अधिकारियों की टीम शामिल रही और यह कदम उच्च अधिकारियों के निर्देशन में उठाया गया। इस कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप का माहौल है।





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