राजधानी से 300 किलोमीटर दूर बॉर्डर जिले का थाना—जहां चेकिंग की खबरों से लोग पहले ही गरम हैं। ऊपर से पूछो तो जवाब—“ऐसी कोई चेकिंग नहीं।” लेकिन हिसाब रोज का चाहिए—महीने, हफ्ते और दिन का पूरा लेखा-जोखा। बैठक में जैसे ही गड़बड़ी की भनक लगी, संबंधित दौड़ते हुए सफाई देने पहुंच गया। साहब ने कागज-कलम उठाया और टोल से गुजरने वाली गाड़ियों का पूरा डेटा सामने रख दिया। अब जनाब बगलें झांक रहे हैं—क्योंकि टोल से जो निकला, वह इनके दरवाजे से भी गुजरा ही होगा। हिसाब में गड़बड़ी, और पकड़ भी पक्की—अब बोलती बंद।












