बड़े पद से रिटायर हुए साहब, लेकिन ठाठ अभी भी सर्विस वाले ही हैं। नौकरी में अर्दली, ड्राइवर, खानसामा, माली....
बड़े पद से रिटायर हुए साहब, लेकिन ठाठ अभी भी सर्विस वाले ही हैं। नौकरी में अर्दली, ड्राइवर, खानसामा, माली—पूरा लश्कर सेवा में लगा रहता था, अब रिटायरमेंट के बाद भी फरमाइशों का मीटर डाउन होने का नाम नहीं ले रहा। कुछ स्टाफ अभी भी सेवा में है, मगर साहब की लिस्ट ऐसी कि पूरी ही नहीं होती। जो इंतजाम कर रहे हैं, वही सबसे ज्यादा हलकान हैं—रोज नई मांग, नया फरमान। खानसामा, ड्राइवर, अर्दली, माली…घर को मिनी कैंप ऑफिस बना रखा है। शुरू में सबने श्रद्धा दिखाई, अब सबकी सांस फूल रही है। विभाग के अफसर सोच रहे हैं—रिटायरमेंट हुआ है या अपग्रेडेशन!