मंत्री जी का हाल इन दिनों ऐसा है कि कुर्सी है, पर कंट्रोल कहीं और है। रोज नया विवाद....
मंत्री जी का हाल इन दिनों ऐसा है कि कुर्सी है, पर कंट्रोल कहीं और है। रोज नया विवाद, रोज नई शिकायत। ऊपर तक फाइलें पहुंच चुकी हैं और तिरछी नजर पड़ते ही कईयों की कुर्सी हिल सकती है। दरबार में हाजिरी लगाते-लगाते थक चुके मंत्री जी अब फिलॉसफी पर उतर आए हैं—“जो ऊपर वाला चाहेगा, वही होगा।” ऊपर वाला यानी दिल्ली। अब तो खुद ही कहने लगे हैं—अगर इतना ही है तो विभाग ही बदल दो, कम से कम चैन की सांस तो मिले।