नई दिल्ली, 07 अप्रैल 2026।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने वैश्विक भू-राजनीतिक परिवर्तनों के बीच भारत की कृषि क्षेत्र की मजबूती बढ़ाने के लिए एक उच्च स्तरीय विशेष कार्यबल (STF) गठित किया है। यह निर्णय कार्यबल की पहली बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक ने की। बैठक में राष्ट्रीय खाद्य एवं इनपुट सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई।
कार्यबल का मुख्य उद्देश्य किसानों तक बेहतर पहुंच, संसाधनों का अधिकतम उपयोग और कृषि में विविधता को बढ़ावा देना है। साथ ही तकनीकी अपनाने और शासन तंत्र को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
ICAR अपनी प्रमुख पहलों के तहत ‘मेरा गाँव मेरा गौरव’ अभियान को और सशक्त करेगा, जिसमें 100 आकांक्षी जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का लक्ष्य किसानों के साथ सक्रिय संपर्क स्थापित करना, वैज्ञानिक कृषि प्रथाओं का पूर्ण पैकेज उपलब्ध कराना और जमीनी स्तर पर आत्मविश्वास बढ़ाना है।
मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और उर्वरक उपयोग को संतुलित बनाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर पर संतुलित उर्वरक और जैविक इनपुट का प्रयोग प्रोत्साहित किया जाएगा और जिलेवार आंकलन के माध्यम से गेहूँ और धान जैसी प्रमुख फसलों में खपत को अनुकूलित किया जाएगा।
कार्यबल ने फसल विविधीकरण और भूमि के कुशल उपयोग को भी प्राथमिकता दी है। इसमें बाजरा उगाने वाले क्षेत्रों का नक्शा तैयार करना और कम उत्पादकता वाले धान क्षेत्रों में उच्च मूल्य वाली वैकल्पिक फसलें अपनाने को प्रोत्साहित करना शामिल है। साथ ही खरीफ मौसम में ईको-फिशरीज को एकीकृत कर किसानों की आय बढ़ाने के उपाय भी अपनाए जाएंगे।
तकनीकी अपनाने के दृष्टिकोण से ICAR यांत्रिक हस्तक्षेप जैसे डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) को बढ़ावा दे रहा है और मौसम विज्ञान आधारित जानकारी के माध्यम से सलाह प्रणाली को मजबूत कर रहा है। इन प्रयासों का लक्ष्य उत्पादकता बढ़ाना और संसाधनों पर निर्भरता कम करना है।
सफल कार्यान्वयन के लिए विभिन्न विषय विशेषज्ञ विभागों में नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं, जो साप्ताहिक आधार पर प्रगति की निगरानी करेंगे और एकीकृत कार्य योजना का समन्वय करेंगे।
विशेष कार्यबल आवश्यकतानुसार बैठक करेगा और संस्थागत प्रतिक्रिया व डेटा आधारित निष्कर्षों के माध्यम से सरकार को समय पर सिफारिशें देगा, ताकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के कृषि क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।










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