साहब ने सोचा था कि किस्मत का पहिया घूम गया, लेकिन निकला पंक्चर। अदालत का फैसला....
साहब ने सोचा था कि किस्मत का पहिया घूम गया, लेकिन निकला पंक्चर। अदालत का फैसला आया तो खुशी में भोपाल की टिकट कट गई। चर्चा भी चल पड़ी कि अब तो बड़ा पद पक्का। लेकिन ऊपर से ब्रेक लग गया—“रुको, अभी पढ़ाई करो फैसले की।” कुछ दिन में उम्मीदें भी ठंडी पड़ गईं। अब साहब फिर वही पुराना डायलॉग दोहरा रहे हैं—दुनिया उम्मीद पर कायम है, हमारी कुर्सी भी शायद उसी पर टिकी है।