पिछले पखवाड़े होली क्या आई, साहब पर ऐसा रंग चढ़ा कि उतरने का नाम नहीं ले रहा। जिले में धूमधाम से आयोजन, पसंदीदा थानेदारों के साथ अलग से स्पेशल होली—पूरा पैकेज। गुलाल और रंग से शुरू हुआ शौक अब चर्चा का स्थायी विषय बन गया है। जनता, विभाग और बाकी लोगों के साथ भी “रंग जमाने” का सिलसिला जारी है। शहर में चर्चा है—साहब की होली अभी खत्म नहीं हुई, बस कैलेंडर बदल गया है।












