सरकार व नीतियाँ
23 May, 2026

भारत में अब भी कई देशों से सस्ता पेट्रोल-डीजल, कीमतों में बढ़ोतरी का कारण वैश्विक दबाव और राज्य कर

देश में हाल में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के बावजूद वैश्विक तुलना में भारत में ईंधन अब भी सस्ता बना हुआ है, जबकि कीमतों में अंतर का प्रमुख कारण राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला वैट और अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव बताया जा रहा है।

नई दिल्ली, 23 मई ।

देश में हाल के दिनों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, हालांकि वैश्विक स्तर पर तुलना करने पर भारत में ईंधन की कीमतें अब भी कई देशों की तुलना में कम बनी हुई हैं।

तेल विपणन कंपनियों ने पिछले दस दिनों में तीन बार कीमतों में बढ़ोतरी की है, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल के दाम करीब पांच रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं। यह बढ़ोतरी पश्चिम एशिया में तनाव, अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव जैसे कारणों से जुड़ी बताई जा रही है।

अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार कई देशों में इस अवधि के दौरान ईंधन की कीमतों में 10 से 90 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है, जबकि भारत में यह बढ़ोतरी लगभग पांच प्रतिशत के आसपास रही है। भारत में खुदरा कीमतों में हुई यह वृद्धि वैश्विक औसत की तुलना में अपेक्षाकृत कम मानी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार देश में पेट्रोल और डीजल की अंतिम कीमतों में राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले वैट और स्थानीय करों की बड़ी भूमिका होती है, जिसके कारण अलग-अलग राज्यों में ईंधन के दामों में अंतर देखने को मिलता है। केंद्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाले उत्पाद शुल्क की दर समान होती है, लेकिन राज्य स्तर पर लगने वाले करों के कारण कीमतों में भिन्नता आ जाती है।

कई राज्यों में वैट दर अधिक होने के कारण वहां ईंधन महंगा है, जबकि कुछ राज्यों में अपेक्षाकृत कम कर लगाए जाने से कीमतें कम हैं। इसी कारण देश में पेट्रोल-डीजल के दाम राज्यवार अलग-अलग दिखाई देते हैं और उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर पड़ता है।

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