नई दिल्ली, 25 मई।
मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक होने के मामलों पर संज्ञान लेते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार एवं परीक्षा नियामक संस्था को नोटिस जारी किया है। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा के नेतृत्व वाली पीठ ने इस प्रकरण पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए टिप्पणी की है कि परीक्षा संचालन प्रणाली पूर्व की त्रुटियों से सबक लेने में विफल रही है।
न्यायालय ने परीक्षा नियामक संस्था को निर्देश दिया है कि वर्ष 2024 के पूर्ववर्ती आदेशों के अनुपालन में गठित उच्च-स्तरीय समिति की अनुशंसाओं पर अब तक की गई कार्रवाई का विवरण तीन दिनों के भीतर एक स्थिति रिपोर्ट (स्टेटस रिपोर्ट) के रूप में प्रस्तुत किया जाए। यह समिति परीक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के सुझाव देने के लिए स्थापित की गई थी।
विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया में व्यापक सुधार और पूर्ण पारदर्शिता की मांग की गई है। याचिकाओं में मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के वर्तमान ढांचे में आमूलचूल परिवर्तन करने तथा नियामक संस्था के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई का आग्रह किया गया है। प्रस्ताव दिया गया है कि वर्तमान संस्था के स्थान पर एक स्वायत्त प्राधिकरण का गठन किया जाए, जो वैधानिक जवाबदेही और न्यायिक निगरानी के अधीन कार्य करे।
इसके अतिरिक्त, भविष्य में होने वाली परीक्षाओं को पेन-पेपर आधारित पद्धति से परिवर्तित कर कंप्यूटर-आधारित परीक्षण (सीबीटी) प्रणाली में बदलने का सुझाव दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि इस परिवर्तन हेतु साइबर सुरक्षा, परीक्षा केंद्रों के बुनियादी ढांचे और अभ्यर्थियों की सुलभता का पूर्ण विवरण सुनिश्चित करने वाली एक समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही, हालिया परीक्षा में हुई प्रणालीगत विफलता की जांच उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में कराए जाने और इस प्रक्रिया की न्यायिक निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की गई है।







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