नई दिल्ली, 26 मई।
भारत और जापान के बीच कार्यबल गतिशीलता और मानव संसाधन विकास में सहयोग को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से टोक्यो में एक उच्च-स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में दोनों देशों के नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के अग्रणी व्यक्तियों और शैक्षणिक संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
संगोष्ठी के दौरान वैश्विक कार्यबल के एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में भारत की उभरती भूमिका पर विशेष चर्चा की गई। मंत्रालय की सचिव ने अपने संबोधन में अंतरराष्ट्रीय श्रम गतिशीलता के लिए एक पारदर्शी, नैतिक और व्यापक मार्ग तैयार करने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग का उद्देश्य न केवल कुशल श्रम शक्ति का आदान-प्रदान करना है, बल्कि मानव संसाधन विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाना भी है।
कार्यक्रम के समापन सत्र में, भारत-जापान के बीच जन-सहयोग के महत्व को रेखांकित किया गया। भविष्य की योजनाओं पर चर्चा करते हुए यह संकल्प व्यक्त किया गया कि अगले 10 वर्षों में लगभग 50,000 लोगों को शामिल करने के लक्ष्य के साथ एक महत्वाकांक्षी मानव विनिमय कार्यक्रम को मूर्त रूप दिया जाएगा। यह संगोष्ठी दोनों देशों के बीच भविष्य के कार्यबल सहयोग को नई गति प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगी।















