भोपाल, 25 मई ।
प्रदेश में रेशम उद्योग को नई पहचान दिलाने की दिशा में नर्मदापुरम जिला तेजी से उभरकर सामने आया है। नर्मदापुरम अब मध्यप्रदेश का एकमात्र ऐसा जिला बन गया है, जहां मलबरी, टसर, ईरी और मूंगा, चारों प्रकार के रेशम का उत्पादन किया जा रहा है। जिले में तैयार होने वाले रेशमी उत्पाद अब ऑनलाइन बाजार तक पहुंच चुके हैं और फ्लिपकार्ट व अमेज़न जैसे मंचों पर भी बिक्री हो रही है।
जिले का प्रमुख रेशम केंद्र मालाखेड़ी सिल्क कैंपस में संचालित हो रहा है, जहां “फार्म से फेब्रिक” तक की पूरी प्रक्रिया पूरी की जाती है। वर्ष 2025 में यहां 742 किलोग्राम मलबरी रेशम धागे का उत्पादन किया गया। उत्पादन कार्यों से जुड़ी 32 महिलाओं को 5.78 लाख रुपये की मजदूरी मिली, वहीं धागे की ट्विस्टिंग प्रक्रिया में शामिल 10 महिलाओं को 2.50 लाख रुपये का भुगतान किया गया।
मालाखेड़ी में मध्यप्रदेश की पहली ककून मंडी भी संचालित की जा रही है। यहां से 13,781 किलोग्राम ककून पश्चिम बंगाल और कर्नाटक के व्यापारियों को भेजे गए, जिससे किसानों को करीब 51.99 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई। इसके अलावा यहां तैयार “प्राकृत” ब्रांड की साड़ियां और परिधान शोरूम में भी उपलब्ध हैं।
पचमढ़ी रेशम केंद्र में पांच एकड़ क्षेत्र में मूंगा रेशम के लिए पौधरोपण किया गया है, जहां 500 ककून का उत्पादन हो रहा है। वहीं मढ़ई रेशम केंद्र को सिल्क टूरिज्म के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां पर्यटक रेशम उत्पादन की प्रक्रिया को करीब से देख रहे हैं।
नर्मदापुरम जिले में वर्तमान में 16 मलबरी और 12 टसर रेशम केंद्र सक्रिय रूप से संचालित हो रहे हैं। इन केंद्रों से हजारों किसान और स्थानीय महिलाएं जुड़कर रोजगार प्राप्त कर रही हैं। वर्ष 2025 में जिले में 15,426.5 किलोग्राम मलबरी ककून उत्पादन हुआ, जिससे 255 हितग्राहियों को लाभ मिला। टसर ककून उत्पादन में भी पिछले वर्ष की तुलना में 2.68 लाख किलोग्राम की वृद्धि दर्ज की गई है।
मालाखेड़ी रेशम विकास केंद्र में अब रेशम धागों से दवाइयां और मेडिकल उत्पाद तैयार करने का कार्य भी शुरू हो गया है। इसके लिए फाई ब्रोहित कंपनी और सरदार वल्लभ भाई पटेल पॉलिटेक्निक कॉलेज के साथ अनुबंध किया गया है। यहां पाउडर, क्रीम, सेरी बैंडेज और सिजेरियन बैंडेज जैसे उत्पाद विकसित किए जा रहे हैं।
रेशम केंद्रों के दोबारा संचालन से महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने के साथ “लखपति दीदी” अभियान को भी मजबूती मिल रही है। नर्मदापुरम की यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देने में अहम भूमिका निभा रही है।







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