रायपुर, 26 मई ।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के घने वन क्षेत्र में एक चार वर्षीया बाघिन की मौजूदगी ने वन्यजीव विशेषज्ञों और वन विभाग के सामने नई पहेली खड़ी कर दी है।
यह बाघिन पहली बार जनवरी माह में जंगल में लगाए गए निगरानी कैमरों में दिखाई दी थी, जिसके बाद अप्रैल और मई में भी उसकी तस्वीरें फिर सामने आईं, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि वह अब इस क्षेत्र में स्थायी रूप से रह रही है।
रायपुर से लगभग एक सौ साठ किलोमीटर दूर स्थित यह संरक्षित क्षेत्र लंबे समय से बाघों की घटती संख्या से जूझ रहा था, ऐसे में इस नई बाघिन की उपस्थिति को वन्यजीव संरक्षण के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
वन विभाग ने बाघिन की धारियों के आधार पर उसकी पहचान का प्रयास करते हुए नमूने संबंधित संस्थान को भेजे, लेकिन किसी भी मौजूदा रिकॉर्ड से उसका मिलान नहीं हो सका। इसके बाद उसके मल के नमूनों की जांच कराई गई, जिसमें यह पुष्टि हुई कि वह मादा बाघ है, हालांकि उसकी उत्पत्ति और आगमन का मार्ग अब भी अज्ञात बना हुआ है।
वन अधिकारियों के अनुसार आसपास के किसी भी वन क्षेत्र या निगरानी नेटवर्क में इस बाघिन का कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं मिला है, जबकि सामान्यतः मादा बाघ अपने जन्म क्षेत्र से सीमित दूरी के भीतर ही अपना नया इलाका चुनती हैं, ऐसे में उसका इतनी दूर तक पहुंचना विशेषज्ञों के लिए आश्चर्य का विषय है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बाघिन लंबे समय तक इसी क्षेत्र में रहती है और भविष्य में किसी नर बाघ की मौजूदगी भी दर्ज होती है, तो यह टाइगर रिजर्व में प्राकृतिक प्रजनन और बाघों की संख्या बढ़ने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत साबित हो सकता है, जिससे इस क्षेत्र के लिए नई उम्मीदें जगी हैं।















