गुजरात, 26 मई ।
गिर वन क्षेत्र में तीन शावकों सहित कुल आठ शेरों की मौत के बाद वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और इस घटना को लेकर चिंता का माहौल बन गया है। वन विभाग के अनुसार मृत पाए गए शेरों में दो शावकों की मौत संदिग्ध बाबेसिया संक्रमण के कारण होने की आशंका जताई गई है, जबकि अन्य मामलों में प्राकृतिक कारणों तथा आपसी संघर्ष को वजह माना जा रहा है।
राज्य के वन मंत्री ने जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि गिर क्षेत्र में किसी तरह की व्यापक महामारी या बड़े स्तर पर संक्रमण की स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि केवल दो मामलों में ही बाबेसिया संक्रमण की आशंका सामने आई है, जबकि शेष मौतों का इस रोग से कोई संबंध नहीं पाया गया है।
उन्होंने यह भी बताया कि बाबेसिया एक परजीवी जनित रोग है, जो मुख्य रूप से किलनी के माध्यम से फैलता है और शरीर में प्रवेश कर लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर देता है, जिससे गंभीर रक्ताल्पता की स्थिति बनती है और कई बार मृत्यु भी हो सकती है। वन विभाग की टीमें तथा पशु चिकित्सक संभावित संक्रमण की रोकथाम और उपचार कार्य में लगातार जुटे हुए हैं।
वन अधिकारियों के अनुसार तीन अन्य शावकों की मौत अलग-अलग क्षेत्रों में दर्ज की गई है, जिनमें एक की मौत आपसी संघर्ष से तथा दो की प्राकृतिक कारणों से हुई है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि शावकों की जीवित रहने की दर सामान्य रूप से कम होती है, फिर भी संरक्षण और निगरानी व्यवस्था के चलते स्थिति पर नियंत्रण बना हुआ है।
गौरतलब है कि वर्ष 2018 में भी इसी बाबेसिया संक्रमण के कारण एक माह के भीतर ग्यारह शेरों की मौत हुई थी। वर्तमान में एशियाई शेरों की संख्या बढ़कर आठ सौ इक्यानबे तक पहुंच गई है, जो वन विभाग के अनुसार हाल के वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि का संकेत है।














