योल, 27 मई।
वेद मन्दिर योल में चल रहे 78 दिवसीय महायज्ञ के 46वें दिन स्वामी राम स्वरूप जी ने यजुर्वेद के 31वें अध्याय पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने जिज्ञासुओं को ईश्वर द्वारा रचित सृष्टि के रहस्यों से परिचित कराया। उनके अनुसार, इस अध्याय का अध्ययन सृष्टि निर्माण की प्रक्रिया को संक्षिप्त रूप में समझने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
स्वामी जी ने स्पष्ट किया कि परमात्मा की असीम शक्ति और प्रकृति के जटिल रहस्यों को केवल वेदों के माध्यम से ही जाना जा सकता है। उन्होंने व्यास मुनि के योग शास्त्र का हवाला देते हुए कहा कि जो व्यक्ति सृष्टि रचना के वैदिक ज्ञान से अनभिज्ञ है, उसे साधु कहलाने का अधिकार नहीं है। चारों वेदों का नियमित अध्ययन मनुष्य के मन में उठने वाले भ्रमों और संशयों को पूरी तरह मिटाने में सक्षम है। यजुर्वेद के सिद्धांतों के अनुसार अन्न, धन, घी, दूध और समस्त प्राणियों की उत्पत्ति परमेश्वर की कृपा से ही संभव हुई है।
मंत्र 31/7 की व्याख्या करते हुए उन्होंने बताया कि मानव कल्याण के उद्देश्य से ही ईश्वर ने चारों वेदों का ज्ञान प्रदान किया है। स्वामी जी ने वर्तमान परिवेश पर चिंता प्रकट की कि मनुष्य भौतिक सुख-सुविधाओं जैसे भोजन, आवास और वस्त्र के पीछे तो भाग रहा है, लेकिन आध्यात्मिक ज्ञान की उपेक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि ईश्वर को न जानकर मनमर्जी की पूजा करना ही मनुष्यों के समस्त दुखों का मूल कारण है। अंत में उन्होंने सभी को वेदों की राह पर चलने और ईश्वर की सच्ची उपासना करने के लिए प्रेरित किया।















