बारामूला, 25 मई।
जम्मू-कश्मीर के कोने-कोने में ईद-उल-अजहा का त्योहार बड़े ही धार्मिक उत्साह और अकीदत के साथ मनाया गया। बारामूला के ईदगाह कदीम शेरी खास में हजारों की तादाद में नमाजियों ने जमा होकर ईद की विशेष नमाज अदा की। इस ऐतिहासिक स्थल पर उमड़ी भीड़ इस त्योहार के महत्व को दर्शा रही थी। मौलाना तारिक अहमद नापा साहिब ने नमाज की अगुवाई करते हुए लोगों को कुर्बानी, इंसानियत और आपसी भाईचारे की शिक्षाओं पर चलने का आह्वान किया। नमाज के बाद वहां मौजूद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर मुबारकबाद दी और बच्चों की खुशी का माहौल देखते ही बन रहा था।
इसी तरह जम्मू के रेजिडेंसी रोड पर भी सुबह-सवेरे नमाजियों का तांता लगा रहा। कश्मीर घाटी की सभी प्रमुख मस्जिदों और ईदगाहों में आस्था का सैलाब देखने को मिला। श्रद्धालु सुबह से ही नमाज के लिए एकत्रित होने लगे थे। पूरे इलाके में ईद की मुबारकबाद और शांति की गूंज सुनाई दी। धार्मिक गुरुओं ने अपने संबोधन में कुरान की आयतों के जरिए सब्र, दया और सामाजिक उत्तरदायित्वों को निभाने का संदेश दिया। इस दौरान पूरे प्रदेश में खुशहाली और अमन-चैन के लिए विशेष दुआएं की गईं।
रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजे बच्चों ने अपने परिवारजनों के साथ ईदगाहों की रौनक बढ़ाई। नमाज के पश्चात लोगों ने आपस में गले मिलकर प्यार और एकता का संदेश साझा किया। स्थानीय परंपराओं का पालन करते हुए परिवारों ने अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से मुलाकात की। कई लोगों ने कब्रिस्तानों का रुख कर अपनों को याद किया। घरों में कुर्बानी की रस्म के साथ कृतज्ञता और आस्था का यह पावन पर्व उल्लास के साथ संपन्न हुआ।














