कटक, 25 मई।
कटक के केशव धाम स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर परिसर में आयोजित एक प्रमुख वैचारिक प्रशिक्षण शिविर का समापन समारोह संपन्न हुआ। इस सत्र के मुख्य वक्ता ने अपने संबोधन में 'पंच परिवर्तन' के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने और राष्ट्र के प्रति नागरिक कर्तव्यों को रेखांकित करने पर विशेष जोर दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए वक्ता ने कहा कि राष्ट्र निर्माण का लक्ष्य व्यक्ति निर्माण के सिद्धांत से ही सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को संगठित कर आत्महीनता की भावना को दूर करना और चरित्र निर्माण के माध्यम से भारत को वैश्विक स्तर पर पुनः वैभवशाली बनाना ही मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने हिंदुत्व को मानवता, सहिष्णुता और विश्व कल्याण पर आधारित एक जीवन दर्शन बताते हुए कहा कि राष्ट्रमाता की संतान होने के नाते समाज का एकजुट होना भविष्य के लिए अनिवार्य है।
वक्ता ने प्रशिक्षण शिविर के संदर्भ में कहा कि एक सदी से जारी यह यात्रा केवल एक संगठन की गतिविधि नहीं, बल्कि हिंदू समाज में व्याप्त आत्मविस्मृति, अनुशासनहीनता और संगठनहीनता जैसी कमजोरियों को दूर कर उसे संगठित करने का निरंतर प्रयास है। उन्होंने कहा कि दैनिक शाखाओं के माध्यम से अनुशासन और राष्ट्र प्रथम की भावना विकसित की जा रही है, जो आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
कार्यक्रम में 'पंच परिवर्तन' की अवधारणा को विस्तार से स्पष्ट किया गया। इसके अंतर्गत पांच प्रमुख स्तंभों—पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वदेशी चेतना, नागरिक कर्तव्य और कुटुंब प्रबोधन—पर चर्चा की गई। वक्ता ने आह्वान किया कि प्लास्टिक का सीमित उपयोग, जल संरक्षण, वृक्षारोपण और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाना ही व्यावहारिक जीवन में हिंदुत्व का पालन है। साथ ही, संविधान का पालन, मतदान प्रक्रिया में सक्रियता, यातायात नियमों के प्रति संवेदनशीलता और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा को नागरिक कर्तव्यों का अनिवार्य हिस्सा बताया गया।
उन्होंने भारतीय परिवार व्यवस्था को समाज की मूल इकाई बताते हुए संयुक्त परिवार परंपरा और बच्चों में नैतिक संस्कार निर्माण की आवश्यकता पर भी बल दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिक्षा विभाग के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने भी शिरकत की और राष्ट्रभक्ति एवं चरित्र निर्माण के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की।
उल्लेखनीय है कि 9 से 24 मई तक चले इस प्रशिक्षण सत्र में 19 जिलों के 183 स्थानों से आए 308 शिक्षार्थियों ने शारीरिक, बौद्धिक एवं सेवा-संपर्क संबंधी विषयों का गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया।














