भीलवाड़ा , 20 मई ।
राजस्थान की धरती पर सिंधी समाज को अपनी जड़ों, मातृभाषा, संस्कृति और सनातन मूल्यों से जोड़ने के उद्देश्य से निकली सिंधु संस्कृति गौरव यात्रा मंगलवार रात शाहपुरा पहुंची, जहां पूरे शहर में धार्मिक उल्लास और सांस्कृतिक एकजुटता का माहौल छा गया।
यात्रा के आगमन पर शहर के विभिन्न स्थानों पर भव्य स्वागत किया गया और “जय झूलेलाल”, “सिंधु संस्कृति अमर रहे” तथा “सनातन धर्म की जय” जैसे नारों से वातावरण गूंज उठा।
यह गौरव यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित न रहकर समाज जागरण, सांस्कृतिक संरक्षण और नई पीढ़ी को अपनी पहचान से जोड़ने के व्यापक अभियान के रूप में उभरती दिखाई दी। त्रिमूर्ति स्मारक से लेकर संत कंवरराम धर्मशाला तक महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने पुष्पवर्षा और माल्यार्पण कर यात्रा का स्वागत किया।
संत कंवरराम धर्मशाला में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह यात्रा समाज को उसकी जड़ों से जोड़ने का ऐतिहासिक प्रयास है और आधुनिकता की दौड़ में नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि सिंधी समाज की पहचान सेवा, त्याग, व्यापारिक नैतिकता और सनातन मूल्यों से रही है तथा राष्ट्रभक्ति और सामाजिक समरसता इस समाज की विशेष पहचान रही है, जिसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना सामूहिक जिम्मेदारी है।
यात्रा से जुड़े पदाधिकारियों ने जानकारी दी कि यह 29 दिवसीय गौरव यात्रा राजस्थान के 31 जिलों में लगभग 5 हजार किलोमीटर का सफर तय करेगी, जिसके दौरान सिंधु संस्कृति सम्मेलन, युवा संवाद, मातृशक्ति सम्मेलन, बाल संस्कार शिविर और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इस अभियान का उद्देश्य युवाओं में सांस्कृतिक चेतना जागृत करना और उन्हें अपनी सभ्यता, संस्कार तथा परंपराओं से जोड़ना बताया गया।
मातृशक्ति प्रतिनिधियों ने कहा कि संस्कृति और संस्कारों को घर-घर तक पहुंचाने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और बाल संस्कार शिविरों के माध्यम से बच्चों को भारतीय संस्कृति तथा सिंधी परंपराओं की शिक्षा दी जा रही है।
कार्यक्रम में सिंधु दर्शन यात्रा की आगामी योजनाओं की जानकारी भी दी गई, जिसमें समाज को ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने पर बल दिया गया।
त्रिमूर्ति स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देशभक्ति और समाज संगठन का संदेश दिया गया तथा बाद में आयोजित समारोह में समाज के विभिन्न पदाधिकारियों की उपस्थिति में कार्यक्रम संपन्न हुआ, जहां बड़ी संख्या में समाजबंधु, महिलाएं और युवा शामिल रहे और पूरे आयोजन में सांस्कृतिक एकजुटता और उत्साह स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।




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