भोपाल, 25 मई ।
मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के अंतर्गत संचालित “सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग” में सोमवार को विज्ञान आधारित कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। “वर्चुअल साइंस फन कैंप” और “साइंस ऑफ साउंड्स” विषयों पर आयोजित इन कार्यशालाओं का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, जिज्ञासा, रचनात्मकता और तकनीकी समझ को विकसित करना रहा।
कार्यक्रम में विभिन्न विद्यालयों से पहुंचे 34 विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भागीदारी की और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े आधुनिक डिजिटल उपकरणों, प्रयोगात्मक गतिविधियों और व्यवहारिक वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझा। इस अवसर पर मैपकास्ट के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी सहित वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए।
मैपकास्ट के वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए विज्ञान शिक्षा में प्रयोग आधारित सीखने, जिज्ञासा और रचनात्मक सोच के महत्व पर चर्चा की। छात्रों को ऑनलाइन वैज्ञानिक उपकरणों और डिजिटल लैब टूल्स के उपयोग की जानकारी दी गई। वर्चुअल माइक्रोस्कोप, स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप, ओरिगामी और अन्य डिजिटल प्रयोगशाला उपकरणों के उपयोग और महत्व को भी विद्यार्थियों ने करीब से समझा।
रोचक गतिविधियों और प्रयोगों के जरिए विद्यार्थियों को मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। ब्रेन एक्टिविटीज के माध्यम से मस्तिष्क की कार्यप्रणाली के साथ हेलमेट की उपयोगिता और सुरक्षा के महत्व को भी समझाया गया। वहीं “साइंस ऑफ साउंड्स” कार्यशाला में ध्वनि विज्ञान से जुड़े सिद्धांतों और प्रयोगों को व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत किया गया।
विद्यार्थियों ने फ्रीक्वेंसी, वेवलेंथ, एम्प्लिट्यूड और विभिन्न प्रकार की तरंगों के सिद्धांतों को प्रयोगों के माध्यम से समझा। माउथ ऑर्गन किट और अन्य साउंड किट्स तैयार कर ध्वनि उत्पन्न होने और उसके संचरण की प्रक्रिया को जाना। साथ ही वैक्यूम में ध्वनि का संचार क्यों नहीं होता, इसकी वैज्ञानिक वजहों से भी उन्हें अवगत कराया गया। संगीत वाद्ययंत्रों से निकलने वाली ध्वनियों की विशेषताओं और अंतर को भी विद्यार्थियों ने समझा।
कार्यशालाओं के दौरान वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को विज्ञान को केवल किताबों तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन में व्यवहारिक रूप से समझने और अपनाने के लिए प्रेरित किया।




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