धर्म / अध्यात्म
28 May, 2026

बुद्ध शिष्यों के पवित्र अवशेष मंगोलिया रवाना, भोपाल से राजकीय विदाई

भगवान बुद्ध के परम शिष्यों के पवित्र अस्थि अवशेषों को राजकीय सम्मान के साथ मंगोलिया रवाना किया गया, जहां इनके प्रदर्शन से वैश्विक स्तर पर पहचान को मजबूती मिलने की बात कही गई।

भोपाल, 28 मई ।

मध्य प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि भगवान बुद्ध के परम शिष्यों के पवित्र अस्थि अवशेष केवल आध्यात्मिक धरोहर ही नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और सौहार्द का संदेश देने वाले प्रतीक भी हैं। उन्होंने कहा कि इन पवित्र अवशेषों के मंगोलिया में प्रदर्शन से विश्व स्तर पर पहचान को नया विस्तार मिलेगा।

गुरुवार को भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर भगवान बुद्ध के परम शिष्यों सारिपुत्र और महामोद्गलायन के पवित्र अवशेषों को राजकीय सम्मान के साथ मंगोलिया रवाना करने के कार्यक्रम में मंत्री पटेल ने कहा कि इन महान शिष्यों की पवित्र अस्थियां दुनिया में केवल भारत, श्रीलंका और म्यांमार में ही संरक्षित हैं। इसे प्रदेश और देश के लिए गौरव का विषय बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे मंगोलिया सहित अन्य देशों के बौद्ध अनुयायी मध्य प्रदेश आने के लिए प्रेरित होंगे।

प्रह्लाद सिंह पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सांस्कृतिक नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार देश की आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक मंच तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने अपने पूर्व कार्यकाल का उल्लेख करते हुए बताया कि संस्कृति मंत्री रहते हुए ऐसी नीति बनाई गई थी कि जिन देशों से बड़ी संख्या में पर्यटक भारत आते हैं, वहां की भाषा में साइन बोर्ड लगाए जाएं। इसी क्रम में श्रीलंका से बड़ी संख्या में पर्यटकों के आगमन पर सांची में स्थानीय भाषा के साइन बोर्ड लगाए गए, जिससे श्रद्धालुओं को यात्रा में सहजता का अनुभव हो सके।

उन्होंने कहा कि सांची केवल स्तूपों के कारण ही विश्व धरोहर स्थल नहीं है, बल्कि इन चैतन्य अस्थि अवशेषों की उपस्थिति इसे वैश्विक श्रद्धा का केंद्र बनाती है। पूर्व में इन पवित्र अवशेषों की थाईलैंड यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और अधिक सशक्त करने वाला प्रयास है।

कार्यक्रम में मौजूद बौद्ध धर्मगुरु बड़े गुरु बानगल उपतिस्स नायक थेरी ने कहा कि सांची केवल ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि आध्यात्मिक वैभव का अनमोल केंद्र है। उन्होंने बताया कि जब पहले ये पवित्र अवशेष थाईलैंड ले जाए गए थे, तब वहां 55 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने श्रद्धाभाव से दर्शन और पूजा-अर्चना की थी। उन्होंने कहा कि बौद्ध परंपरा में इन अवशेषों का सर्वोच्च महत्व है और सांची जैसी पवित्र धरा का संरक्षक बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि भगवान बुद्ध की यह धरोहर विश्व बंधुत्व की अमूल्य निधि है। उन्होंने ‘विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रशासन इस दिशा में पूरी निष्ठा से कार्य कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस आयोजन के माध्यम से मध्य प्रदेश की पहचान मंगोलिया तक और अधिक सशक्त रूप में पहुंचेगी। भविष्य में भी इस प्रकार के सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम अन्य देशों के साथ आयोजित किए जाएंगे।

गरिमामयी विदाई समारोह में छोटे गुरु बानगल विमल तिस्स थेरी, इंटरनेशनल बुद्धिस्ट कॉन्फेडरेशन के संचालक कर्नल यश सक्सेना, संस्कृति विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी राजेश कुमार गुप्ता सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और प्रबुद्धजन मौजूद रहे। धार्मिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों को श्रद्धापूर्वक मंगोलिया यात्रा के लिए विदाई दी गई।

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