नई दिल्ली, 02 जून।
सुप्रीम कोर्ट में पांच वर्ष के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर महिला न्यायाधीश की नियुक्ति हुई है, वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना को उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत किया गया है, जिससे अब शीर्ष अदालत में दो महिला न्यायाधीश हो गई हैं।
इससे पहले केवल न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्ना ही सर्वोच्च न्यायालय में महिला न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थीं, जबकि नवीन नियुक्ति के साथ यह संख्या बढ़कर दो हो गई है।
उच्चतम न्यायालय के कॉलेजियम ने मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में 27 मई को चार उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों तथा वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना के नाम की सिफारिश की थी, जिन्हें केंद्र सरकार ने 31 मई को मंजूरी प्रदान कर दी और आज सभी ने शपथ ग्रहण की।
न्यायमूर्ति वी. मोहना वर्ष 2021 के बाद पहली महिला हैं जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय में नियुक्ति मिली है, इससे पहले एक साथ कई महिला न्यायाधीशों की नियुक्ति का उल्लेख अगस्त 2021 में मिलता है, जब तीन महिला न्यायाधीशों ने एक साथ शपथ ली थी।
अब तक सर्वोच्च न्यायालय में एक समय में अधिकतम चार महिला न्यायाधीश एक साथ कार्यरत रही हैं, लेकिन समय के साथ सेवानिवृत्तियों के बाद यह संख्या घटती गई।
न्यायमूर्ति मोहना एक प्रथम पीढ़ी की अधिवक्ता रही हैं, जिन्होंने 1988 में तमिलनाडु के कोयंबटूर से वकालत की शुरुआत की थी और बाद में 1992 में दिल्ली आकर वरिष्ठ अधिवक्ता इंदु मल्होत्रा के साथ कार्य किया, जो बाद में स्वयं सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनीं।
वर्ष 1996 में उन्होंने अधिवक्ता ऑन रिकॉर्ड परीक्षा उत्तीर्ण की और 2015 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता का दर्जा प्राप्त हुआ।
इसके साथ ही केंद्र सरकार ने अन्य न्यायाधीशों के नामों को भी मंजूरी दी है और इन नियुक्तियों के बाद सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कुल संख्या 37 हो गई है, जबकि स्वीकृत संख्या 38 है।











