दिल्ली, 2 जून ।
राष्ट्रीय राजधानी में पर्यावरणीय संतुलन को सुदृढ़ करने की दिशा में बड़ा निर्णय लेते हुए उपराज्यपाल ने दिल्ली रिज प्रबंधन बोर्ड के पुनर्गठन को स्वीकृति प्रदान की है। यह फैसला सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों तथा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप लिया गया है।
दिल्ली का रिज क्षेत्र राजधानी के हरे फेफड़ों के रूप में जाना जाता है, जो पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, जैव विविधता की रक्षा करने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में अहम भूमिका निभाता है। नए ढांचे का उद्देश्य इसके संरक्षण और निगरानी को अधिक सशक्त बनाना है।
पुनर्गठित बोर्ड की अध्यक्षता दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव करेंगे, जबकि दिल्ली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष इसके सदस्य होंगे। इसके साथ ही केंद्र और दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल किए गए हैं।
नगर निकायों के प्रमुखों, पुलिस प्रशासन, राजस्व विभाग तथा पर्यावरण एवं वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भी बोर्ड में स्थान दिया गया है, ताकि विभिन्न स्तरों पर समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।
जमीनी स्तर पर कार्यों की निगरानी के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। साथ ही केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति के प्रतिनिधि को विशेषज्ञ सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
पर्यावरण विशेषज्ञों और नागरिक समाज की भागीदारी को भी इस पुनर्गठन में विशेष महत्व दिया गया है, जिससे समुदाय आधारित संरक्षण प्रयासों को बल मिल सके।
बोर्ड के अंतर्गत एक स्थायी समिति का गठन भी किया जाएगा, जो त्वरित निर्णय और निगरानी की जिम्मेदारी निभाएगी तथा विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करेगी।
सरकार का मानना है कि इस पुनर्गठन से रिज क्षेत्र के संरक्षण को नई गति मिलेगी तथा विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर तालमेल के माध्यम से राजधानी की पर्यावरणीय सुरक्षा और मजबूत होगी।










