काठमांडू, 03 जून।
नेपाल की राष्ट्रीय सभा में बुधवार को भी लगातार तीसरे दिन विपक्षी सांसदों का जोरदार हंगामा देखने को मिला, जहां सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सदस्य अपनी सीटों पर खड़े होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे और प्रधानमंत्री के बयान पर तीखी आपत्ति दर्ज कराई।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने रविवार को प्रतिनिधि सभा की बैठक में नेपाल-भारत सीमा विवाद पर अपने संबोधन में कहा था कि इस मुद्दे का समाधान केवल कूटनीतिक बातचीत और संवाद के जरिए ही संभव है, साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें यह जानकारी मिली कि केवल भारत की ओर से ही नेपाल की भूमि पर अतिक्रमण नहीं हुआ है, बल्कि नेपाल की तरफ से भी कुछ क्षेत्रों में भारत की भूमि पर अतिक्रमण हुआ है।
प्रधानमंत्री के इस बयान को लेकर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध जताया है और आरोप लगाया है कि यह टिप्पणी राष्ट्रीय हितों तथा सीमा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सरकार की स्थापित नीति और दृष्टिकोण के विपरीत है, जिससे गंभीर राजनीतिक असहमति उत्पन्न हुई है।
विरोध के चलते राष्ट्रीय सभा की पिछली दो बैठकों में भी एजेंडे पर चर्चा आगे नहीं बढ़ सकी थी और आज भी स्थिति वैसी ही रही, जहां हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित रही और संसदीय कामकाज प्रभावित हुआ।
नेपाल-भारत सीमा विवाद को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लगातार गहराते जा रहे हैं, जिसके कारण यह मुद्दा अब संसद के दोनों सदनों में प्रमुख राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है।











